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🌼“‘सारा जगत चमार’ – समाज के जातिगत ढांचे पर संत रविदास का सबसे बड़ा प्रहार” 🌼
“सारा जगत चमार” भावार्थ : संत रविदास जी इस दोहे के माध्यम से मानव समानता का गहरा और क्रांतिकारी संदेश देते हैं। वे कहते हैं कि हर मनुष्य का शरीर चमड़ी, मांस, हड्डी और रक्त से ही बना है। जब सभी की शारीरिक संरचना एक समान है, तो ऊँच-नीच, जाति-भेद और भेदभाव का कोई आधार…