रिपोर्ट : ओम साहू
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जगदलपुर, 5 दिसम्बर 2025।
बकावंड विकासखंड की लीशा मौर्य की कहानी एक झकझोर देने वाली हकीकत है—लेकिन अब वही कहानी उम्मीद और संवेदना का प्रतीक बन चुकी है।
आवासपारा निवासी लीशा मौर्य लगभग कई वर्षों तक घर के एक छोटे, अंधेरे कमरे में अकेले जीवन जीने को मजबूर थीं। परिवारिक परिस्थितियाँ, सामाजिक उपेक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की जटिलता ने उन्हें दुनिया से लगभग काट दिया था।
अगस्त 2024 में उनके नाना श्री रतीराम ने जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग को उनकी दयनीय स्थिति से अवगत कराया। शिकायत मिलते ही विभाग ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की।
👉 कैसे बदली लीशा की जिंदगी?
- समाज कल्याण विभाग की टीम अगले ही दिन घर पहुँची।
- लीशा को कमरे से बाहर निकालकर सफाई, देखभाल करवाई।
- अगले दिन मेडिकल कॉलेज, डिमरापाल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।
- इसके बाद आशीर्वाद घरौंदा गृह, कोलचूर में सुरक्षित रूप से शिफ्ट किया गया।
- नेत्र उपचार और ऑपरेशन भी कराया गया, हालांकि दृष्टि वापस नहीं आ सकी।
13 जुलाई 2025 को नाना श्री रतीराम के निधन के बाद संस्था ही लीशा का स्थायी निवास बन गया।
👉 अब कैसी है लीशा?
संस्था प्रबंधन के अनुसार:
- वे अब स्वस्थ और सुरक्षित हैं।
- दैनिक कार्यों में आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
- आवाज़ देने पर प्रतिक्रिया देती हैं और हल्की बातचीत भी करती हैं।
- अन्य सदस्यों से उनका नियमित संवाद रहता है।
✨ समाज कल्याण विभाग की संवेदनशीलता ने बदला जीवन
वर्षों की उपेक्षा, भय और अंधकार से निकलकर अब लीशा एक सुरक्षित, मानवीय और गरिमापूर्ण वातावरण में नई जिंदगी जी रही हैं।
समय पर हुई सरकारी कार्रवाई ने एक जीवन को बचा लिया — और यही किसी भी प्रशासन की सबसे बड़ी जीत है।
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