बड़ी खबर:कोसारटेडा बांध प्रभावित किसानों के लिए हाईकोर्ट ने 694 करोड़ रुपये की संभावित मुआवजा राशि पर पहल की — पर जिला प्रशासन और सरकार दोनों ‘मौन’!
जगदलपुर/बस्तर: कोसारटेडा बांध विस्थापितों की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने 694 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि के संबंध में राज्य सरकार को कार्रवाई का निर्देश दिया, लेकिन सरकार और जिला प्रशासन अब तक पूरी तरह शांत बैठे हैं।
किसानों का कहना है कि कोर्ट का स्पष्ट आदेश होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है। 2008 में बांध निर्माण के दौरान किए गए वादे, पुनर्वास प्रस्ताव और मुआवजा निर्धारण आज भी अधूरा है।
हाईकोर्ट का निर्देश — सरकार की अनदेखी!
10 मई 2024: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तत्काल कार्रवाई कर विस्थापित किसानों की सभी मांगों का समाधान करने को कहा।
वर्तमान स्थिति: सरकारी विभाग और जिला प्रशासन — पूरी तरह मौन।
किसानों के अनुसार, यदि 694 करोड़ की प्रस्तावित मुआवजा राशि का निपटारा ईमानदारी से किया जाए, तो 1000 से अधिक प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सकता है। परंतु प्रशासनिक उदासीनता और सरकारी लापरवाही के कारण किसान गहरी आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहे हैं।
किसानों की चेतावनी — “अब न्याय नहीं, आंदोलन होगा”
किसान समिति का बयान: “जब हाईकोर्ट का आदेश भी नहीं माना जा रहा, तो अब हम चुप नहीं बैठेंगे। यदि सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो हम राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे।”
- 16 वर्षों से लंबित मुआवजा
- पुनर्वास आज भी अधूरा
- प्रशासन का कोई जवाब नहीं
- सरकारी स्तर पर फाइलें ठंडी पड़ी
समिति की मांगें
मुख्यमंत्री से 3 मुख्य अपेक्षाएँ:
- हाईकोर्ट के आदेश का तत्काल पालन
- 694 करोड़ मुआवजा राशि की वास्तविक समीक्षा और भुगतान प्रक्रिया
- प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास–भूमि आवंटन पूरा किया जाए
विशेष बात यह है कि इस क्षेत्र से भाजपा के कैबिनेट मंत्री और वनमंत्री केदार कश्यप आते हैं। किसानों का कहना है कि “नेता मंत्री बन गए, लेकिन हम विस्थापित आज भी न्याय के बिना संघर्ष कर रहे हैं।”
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रिपोर्ट: ओम साहू
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