पोटियावंड–मोतिगांव मार्ग का पुल गिरा, ग्रामीणों की ज़िंदगी पटरी से उतरी

भ्रष्टाचार की गाथा और सुशासन का किस्सा

📍 बकावंड | रिपोर्ट: ओम साहू


बकावंड विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत पोटियावंड और मोतिगांव को जोड़ने वाला मुख्य पुल भरभराकर गिर गया, जिससे क्षेत्र की जीवनरेखा ही टूट गई है। जिस पुल से रोज़ सैकड़ों ग्रामीण आवाजाही करते थे, वही आज प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट निर्माण का प्रतीक बन चुका है।

🚶‍♂️ 2 किमी का रास्ता अब 7 किमी – जनता भुगते, सिस्टम सोए!

ग्रामीणों के अनुसार, जहां पहले मात्र 2 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती थी, वहीं अब उन्हें 6 से 7 किलोमीटर लंबा रास्ता घूमकर जाना पड़ रहा है। इससे समय, पैसा और परेशानी तीनों बढ़ गए हैं।

  • ⏳ समय बढ़ा
  • 💸 खर्च बढ़ा
  • 😟 मुसीबत कई गुना बढ़ी

👶👩‍🌾🚑 सबसे ज्यादा असर इन पर

  • स्कूली बच्चे – पढ़ाई प्रभावित, रोज़ देरी
  • गर्भवती महिलाएं – अस्पताल पहुंचना मुश्किल
  • बीमार मरीज – समय पर इलाज खतरे में
  • किसान व मजदूर – उपज बाजार तक पहुंचाने में दिक्कत

ग्रामीणों का दर्द छलका: “अब बीमारी से ज़्यादा डर रास्ते का है।”

⚠️ पहले भी चेताया गया था, फिर क्यों नहीं हुई मरम्मत?

ग्रामीणों का कहना है कि पुल लंबे समय से जर्जर था। इसकी शिकायतें पंचायत और संबंधित विभाग को कई बार दी गईं, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज उसी लापरवाही का खामियाजा पूरा इलाका भुगत रहा है।

❓ पुल गिरा… लेकिन अधिकारी अब तक नदारद

  • ❌ कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा
  • ❌ कोई वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी पुल नहीं
  • ❌ कोई लिखित आश्वासन तक नहीं

बरसात के मौसम में स्थिति और भयावह हो सकती है, लेकिन प्रशासन अब भी मौन है।

🔥 ग्रामीणों का अल्टीमेटम

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निरीक्षण कर पुल निर्माण या अस्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।


यह सिर्फ एक पुल के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी, भ्रष्टाचार और जवाबदेही के अभाव की सच्ची तस्वीर है।

अब सवाल यह है — क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?


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