रिपोर्ट: ओम साहू
जगदलपुर, 30 दिसंबर 2025/ बस्तर संभाग की समृद्ध और अनूठी जनजातीय विरासत को संरक्षित करने तथा उसे राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग ने बस्तर पंडुम 2026 के आयोजन की विधिवत घोषणा कर दी है। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा, परंपरा और पहचान को सहेजने का एक ऐतिहासिक प्रयास है।
राज्य शासन की इस पहल के माध्यम से बस्तर की 1885 ग्राम पंचायतों में निवासरत स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों, लोकगायकों और पारंपरिक वैद्यराजों को एक सशक्त मंच प्रदान किया जाएगा, ताकि जनजातीय कला, बोली, रीति-रिवाज, वेशभूषा और वन-औषधियों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
तीन चरणों में होगा भव्य आयोजन
- प्रथम चरण (जनपद स्तर): 10 जनवरी से 20 जनवरी 2026
- द्वितीय चरण (जिला स्तर): 24 जनवरी से 29 जनवरी 2026
- तृतीय चरण (संभाग स्तर): 2 फरवरी से 6 फरवरी 2026, जगदलपुर
अंतिम चरण में बस्तर संभाग के सातों जिलों से चयनित 84 विजेता दल अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
12 विशिष्ट विधाओं में होगी प्रतियोगिता
बस्तर पंडुम 2026 में जनजातीय संस्कृति की विविधता को दर्शाने वाली 12 विशिष्ट विधाओं को शामिल किया गया है। इनमें शामिल हैं —
- गौर-माड़िया, ककसार, परब जैसे पारंपरिक नृत्य
- रिलो-लेजा जैसे लोकगीत
- चापड़ा (चींटी की चटनी), आमट, बांस की सब्जी (बास्ता)
- सल्फी, ताड़ी और छिंदरस जैसे पारंपरिक पेय
- वन-औषधियां, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण
- माओपाटा जैसे लोक-नाट्य
आकर्षक नकद पुरस्कारों की घोषणा
- प्रथम पुरस्कार: ₹50,000
- द्वितीय पुरस्कार: ₹30,000
- तृतीय पुरस्कार: ₹20,000
- अन्य 48 दलों को: ₹10,000 प्रोत्साहन राशि
निष्पक्ष मूल्यांकन, परंपरा का सम्मान
प्रतियोगिता की निष्पक्षता और सांस्कृतिक मौलिकता बनाए रखने के लिए चयन समिति में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ आदिवासी समाज के प्रतिष्ठित मांझी, चालकी, गायता-पुजारी एवं वरिष्ठ समाज प्रमुखों को शामिल किया गया है, जो कला की परंपरागत शुद्धता और पौराणिकता का मूल्यांकन करेंगे।
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संपादक: Om Sahu | संपर्क: 9926750985

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