**MP-MLA पर दर्ज गंभीर आपराधिक मामले:हाईकोर्ट रिपोर्ट ने खोली लंबित न्याय की फाइल, सवालों के घेरे में सियासत**

पेंडिंग केस high कोर्ट बिलासपुर

जगदलपुर | जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ में राजनीति और न्याय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा नवंबर 2025 के लिए जारी की गई
“Updated Status Report of pending MPs/MLAs cases” में यह सामने आया है कि
प्रदेश के कई वर्तमान व पूर्व सांसदों-विधायकों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामले अब भी विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं।
हाईकोर्ट की इस आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों में
IPC की गंभीर धाराएँ, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,
और मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA, 2002) जैसे संवेदनशील कानून शामिल हैं।
इन प्रकरणों में कई केस ऐसे हैं, जो पिछले 4–5 वर्षों से लंबित बताए गए हैं।
⚖️ किस तरह के आरोपों वाले मामले लंबित?
रिपोर्ट में जिन धाराओं का उल्लेख किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से —
IPC की धाराएँ 420, 406, 467, 468, 471
लोकसेवक पर हमला से जुड़ी धाराएँ
दंगा, शासकीय कार्य में बाधा
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े PMLA केस
जैसे गंभीर आरोपों वाले मामले शामिल हैं, जिनकी सुनवाई अलग-अलग जिलों की अदालतों में चल रही है।
📍 रायपुर, कवर्धा, बलौदाबाजार और राजनांदगांव पर नजर
रिपोर्ट में रायपुर, कवर्धा, बलौदाबाजार और राजनांदगांव जैसे जिलों में
वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मामलों की अगली सुनवाई की तारीखें भी दर्ज की गई हैं।
कई प्रकरणों में साक्ष्य की प्रक्रिया अभी जारी बताई गई है।
⏳ न्याय में देरी या व्यवस्था की मजबूरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि सांसद-विधायक मामलों के लिए
फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था होने के बावजूद
लगातार तारीखें बढ़ना, न्याय प्रक्रिया की गति पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
ऐसे मामलों में देरी से जनविश्वास और लोकतांत्रिक जवाबदेही दोनों प्रभावित होती है।
🧠 जनता के लिए यह जानना क्यों ज़रूरी?
लोकतंत्र में जनता को यह जानने का अधिकार है कि
जिन जनप्रतिनिधियों को उसने चुना है,
उनके विरुद्ध किस प्रकार के मामले न्यायालय में लंबित हैं
और उन मामलों की वर्तमान स्थिति क्या है।
⚠️ महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टिकरण
नोट: उपरोक्त सभी प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं।
संबंधित व्यक्तियों को कानून के अनुसार दोष सिद्ध होने तक निर्दोष माना जाता है।
यह समाचार केवल हाईकोर्ट की आधिकारिक रिपोर्ट पर आधारित निष्पक्ष जानकारी है।
✍️ रिपोर्ट: ओम साहू
संपादक – The Eagle 🦅 Eye 👁️ News
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