जगदलपुर / करंजी (ब्लॉक लोहाण्डीगुड़ा, थाना परपा)
ग्राम करंजी में खुद को वन समिति का सदस्य बताने वाले कुछ लोगों द्वारा 45 वर्षों से काबिज 5 परिवारों की जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश के दौरान भीषण विवाद और जानलेवा मारपीट की घटना सामने आई है।
इस हमले में पीड़ित परिवार के लोग लहूलुहान हो गए। एक पीड़ित के सिर में गंभीर चोट आई, 8 टांके लगाने पड़े, वहीं एक अन्य व्यक्ति का पैर टूट गया।
❓ सवाल यह है कि आखिर गैरकानूनी कृत्य करने का अधिकार वन समिति के सदस्यों को किसने दिया?
छत्तीसगढ़ युवा मंच के संस्थापक नरेन्द्र भवानी ने इस पूरे मामले को गंभीर, गैरकानूनी और सुनियोजित बताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
घटना का पूरा विवरण
नरेन्द्र भवानी ने अपने बयान में बताया कि 21 जनवरी को ग्राम करंजी में 7 लोग, जो स्वयं को वन समिति का सदस्य बता रहे थे, पीड़ितों की जमीन में जबरन घुसकर खुदाई करने लगे ताकि वहां झोपड़ी बनाकर कब्जा किया जा सके।
जब पीड़ित परिवारों ने इसका विरोध किया और बताया कि यह जमीन उनकी पुश्तैनी एवं वर्षों से काबिज भूमि है, तो मामला हाथापाई और मारपीट तक पहुंच गया।
पीड़ित परिवार ने आत्मरक्षा में अपने परिवार और जमीन को बचाने का प्रयास किया, इसी दौरान यह गंभीर हिंसा हुई।
⚖️ मामला न्यायालय में विचाराधीन
भवानी ने स्पष्ट किया कि इस जमीन विवाद को लेकर पीड़ित पक्ष पहले ही न्यायालय में केस दायर कर चुका है और मामला विचाराधीन है।
ऐसे में कानून को हाथ में लेकर जबरन कब्जा करने की कोशिश, मारपीट और जानलेवा हमला कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
पहले भी हो चुके हैं हमले और उत्पीड़न
नरेन्द्र भवानी ने बताया कि इससे पहले भी वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा बिना नोटिस पुलिस बल के साथ पीड़ितों के घर तोड़ने का प्रयास किया जा चुका है।
उस दौरान घर में रखा धान और करीब दो लाख रुपये नकद भी लूट लिए गए थे, जिसकी लिखित शिकायत संबंधित विभागों को दी जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
⚠️ 5 दिनों का अल्टीमेटम
भवानी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 5 दिनों के भीतर जिला प्रशासन द्वारा वन विभाग की भूमिका थाना परपा की कार्यवाही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की जाती है, तो हजारों की संख्या में वन विभाग का घेराव किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
📌 बड़े सवाल
- क्या इन 7 लोगों को जमीन कब्जा हटाने का लाइसेंस दिया गया है?
- क्या न्यायालय में विचाराधीन मामले में ऐसी कार्रवाई वैध है?
- इन लोगों को उकसाने वाला कौन है?
- क्या वन विभाग की इसमें कोई भूमिका है?
पीड़ित परिवार पिछले 45 वर्षों से 16 एकड़ भूमि पर काबिज है, जिसमें से लगभग 7 एकड़ में 5 हजार से अधिक पेड़ लगाए गए हैं, जो अब बड़े हो चुके हैं।
बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि या तो कानून व्यवस्था विफल है या फिर किसी के इशारे पर यह सब हो रहा है।
बयान / रिपोर्ट: नरेन्द्र भवानी
संस्थापक: छत्तीसगढ़ युवा मंच

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