जब कर्मचारी चल नहीं सका, तो प्रशासन खुद चलकर पहुंचा उसके घर

लकवाग्रस्त वन कर्मी को घर पर मिला पेंशन आदेश, कलेक्टर आकाश छिकारा की संवेदनशील पहल

जगदलपुर, 30 जनवरी 2026/ बस्तर जिला प्रशासन ने सुशासन के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। कलेक्टोरेट के आस्था कक्ष में जहां एक ओर 16 सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों का विदाई समारोह आयोजित किया गया, वहीं प्रशासन की संवेदनशील सोच उस कर्मचारी तक भी पहुंची जो शारीरिक असमर्थता के कारण समारोह में शामिल नहीं हो सका।

वन विभाग में पदस्थ रहे श्री दिलराज दास के लिए यह दिन बेहद खास था। सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले ही उन्हें लकवा (पैरालिसिस) का गंभीर आघात लगा, जिसके चलते वे चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गए। श्री दास की प्रबल इच्छा थी कि वे कलेक्टोरेट में आयोजित अपने विदाई समारोह में शामिल हों, लेकिन स्वास्थ्य ने इसकी अनुमति नहीं दी।

जब यह जानकारी कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के संज्ञान में आई, तो उन्होंने तत्काल एक संवेदनशील और अनुकरणीय निर्णय लिया। कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा— “अगर कर्मचारी प्रशासन तक नहीं आ सकता, तो प्रशासन खुद उसके पास जाएगा।”

कलेक्टर के निर्देश पर वरिष्ठ कोषालय अधिकारी श्री अनिल कुमार पाठक स्वयं श्री दिलराज दास के निवास पर पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ उनका हाल-चाल जाना, बल्कि उन्हें सम्मानपूर्वक पेंशन भुगतान आदेश (PPO) सहित सभी सेवांत लाभों के भुगतान आदेश घर पर ही सौंपे।

प्रशासन की इस मानवीय पहल से श्री दिलराज दास और उनका परिवार भावुक हो उठा। यह दृश्य साबित करता है कि बस्तर जिला प्रशासन केवल फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि अपने कर्मचारियों के सुख-दुख में पूरी आत्मीयता के साथ खड़ा है।

इस अवसर पर सहायक कोषालय अधिकारी सुश्री ममता ध्रुव सहित कोषालय के अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट: ओम साहू


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