धान खरीदी की हकीकत: बस्तर संभाग में 47,542 किसान खाली हाथ, नियम बने किसानों की सबसे बड़ी मुसीबत

जगदलपुर | The Eagle 🦅 Eye 👁️ News

रिपोर्ट: ओम साहू

बस्तर संभाग में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी समाप्त होने के बाद जो सच्चाई सामने आई है, वह सरकार के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। इस साल 47,542 किसान धान नहीं बेच पाए, जबकि वे पूरी तरह पंजीकृत थे।

👉 कुल पंजीकृत किसान: 2,72,641
👉 धान नहीं बेच पाए किसान:47,542
👉 खरीदी केंद्र: 382

किसानों का आरोप है कि सरकार ने एक ओर हर पंजीकृत किसान का धान खरीदने का भरोसा दिलाया, लेकिन टोकन लिमिट, सत्यापन प्रक्रिया और खरीदी की सीमा ने हजारों किसानों को केंद्रों तक पहुंचने ही नहीं दिया।


⚠️ कर्जदार किसानों पर सबसे बड़ा संकट

सबसे चिंताजनक स्थिति उन कर्जदार किसानों की है, जो इस वर्ष धान नहीं बेच पाए। नियमों के अनुसार ऐसे किसानों को:

  • अगले वर्ष सरकारी समितियों से कर्ज नहीं मिलेगा
  • सहकारी समितियों का कमीशन भी घटेगा

यानि एक बार चूक, और सालों की सजा!


📉 तीन जिलों को सबसे अधिक नुकसान

सबसे अधिक प्रभावित जिले:
🔹 बस्तर
🔹 कोंडागांव
🔹 कांकेर

बीते तीन वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि समस्या लगातार बनी हुई है:

  • 2023-24 : 49,512 किसान
  • 2024-25 : 48,698 किसान
  • 2025-26 : 47,542 किसान

हालांकि संख्या में मामूली कमी आई है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज भी नहीं निकला।


📊 लक्ष्य से पीछे रही खरीदी

इस वर्ष बस्तर संभाग में:

🎯 लक्ष्य: 15,18,531 टन
📦 वास्तविक खरीदी: 13,55,909 टन

यानि करीब 1.6 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया।


🗣️ अधिकारी का पक्ष

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के विपणन अधिकारी संत कुमार कनौजिया का कहना है:

“जिन किसानों ने टोकन कटाने के बाद केंद्रों में पहुंचकर धान लाया, उनका धान खरीदा गया है। खरीदी लिमिट कम होने का असर जरूर पड़ा है।”


❗ बड़ा सवाल

जब किसान पंजीकृत थे, धान तैयार था, तो आखिर खरीदी क्यों नहीं?

क्या नियम किसानों के लिए हैं या किसानों के खिलाफ?


The Eagle 🦅 Eye 👁️ News
सच लिखेंगे • सवाल उठाएंगे • किसान की आवाज बनेंगे

📲 WhatsApp Channel:
Join Now


Posted

in

by

Tags:

Comments

Leave a Reply