रिपोर्ट ओ पी साहू संपादक
🐕☣️ कुत्तों की मौत, मरीजों के परिजन खतरे में, गांव पर मंडरा रहा गंभीर बीमारियों का साया
जगदलपुर | डिमरापाल
मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल डिमरापाल में बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन में भारी लापरवाही सामने आई है, जो अब केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे में तब्दील होती जा रही है।
अस्पताल से निकलने वाला संक्रमित मेडिकल वेस्ट बिना पृथक्करण के थैलों में भरकर खुले में फेंका जा रहा है, जहां आसपास और गांव के स्ट्रीट डॉग्स उसे नोचते और खाते नजर आ रहे हैं। हाउसकीपिंग स्टाफ और स्थानीय लोगों के अनुसार, मेडिकल वेस्ट खाने से कई कुत्ते बीमार पड़े और कुछ की मौत भी हो चुकी है, लेकिन इस पर अब तक कोई आधिकारिक संज्ञान नहीं लिया गया।
☣️ मेडिकल वेस्ट से फैल सकती हैं घातक बीमारियाँ
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह खुले में पड़े बायो-मेडिकल वेस्ट से—
- हेपेटाइटिस-B और C
- टीबी
- स्किन डिज़ीज़
- गैस्ट्रो-इंफेक्शन
- बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण
- रेबीज और ज़ूनोटिक बीमारियाँ
जैसी गंभीर बीमारियाँ फैलने की प्रबल आशंका रहती है।
🐕 संक्रमित कुत्ते बने ‘मूविंग कैरियर’
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मेडिकल वेस्ट के संपर्क में आए कुत्ते कॉलेज के सामने स्थित डिमरापाल गांव में खुलेआम घूमते हैं। यही नहीं, गांव के लोग और मरीजों के परिजन उसी क्षेत्र में नहाते हैं, कपड़े धोते हैं और दैनिक गतिविधियां करते हैं।
ऐसे में ये कुत्ते संक्रमण के चलते फिरते स्रोत (Moving Carrier of Infection) बन चुके हैं, जो भविष्य में डिमरापाल गांव में बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने का कारण बन सकते हैं।
🏥 मरीजों के परिजनों पर भी सीधा खतरा
अस्पताल परिसर के आसपास खुले में घूमते संक्रमित कुत्ते, मरीजों के परिजनों और तीमारदारों के लिए भी गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। खुले में खाना, बच्चों की आवाजाही और अस्थायी ठहराव—इन सभी परिस्थितियों में संक्रमण फैलने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
👉 यह स्थिति साबित करती है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही अब मरीजों की सुरक्षा को भी चुनौती दे रही है।
❓ जिम्मेदार कौन?
जब मीडिया ने इस गंभीर मुद्दे पर अस्पताल के सुप्रिटेंडेंट डॉ. अनुरूप साहू से बात करने की कोशिश की तो वे कार्यालय में अनुपस्थित मिले। फोन पर संपर्क करने पर उनके एयरपोर्ट जाने की जानकारी दी गई, लेकिन मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
⚖️ नियम कागजों में, हकीकत में मौत
विडंबना यह है कि अस्पताल के भीतर Biomedical Waste Management Rules 2016 के चार्ट और रंगीन डस्टबिन लगे हैं, लेकिन वास्तविकता में वही वेस्ट खुले में फेंका जा रहा है। यह दर्शाता है कि नियमों का पालन केवल दिखावे तक सीमित है।
🚨 भविष्य की चेतावनी
यदि समय रहते इस लापरवाही पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो:
- डिमरापाल गांव गंभीर संक्रमण का केंद्र बन सकता है
- मरीजों और उनके परिजनों की जान जोखिम में पड़ सकती है
- पशु मृत्यु के साथ-साथ मानव महामारी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है
👉 यह मामला तत्काल उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही तय करने की मांग करता है।
रिपोर्ट: ओम साहू
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