PMGSY की सड़क गारंटी अवधि में भी बदहाल मेंटेनेंस शून्य, हादसों का खतरा — विभाग और ठेकेदार की जवाबदेही पर सवाल

📍 बस्तर ब्लॉक | ग्राम पंचायत टिकरालोहगा | आश्रित ग्राम – चिढ़ईपदर
✍️ रिपोर्ट: ओम साहू


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत एनएच-43 से कोलचूर तक बनाई गई सड़क आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है। शिलापट के अनुसार यह सड़क पैकेज क्रमांक GC-01-M AR-29 के अंतर्गत निर्मित की गई, जिसकी लंबाई 5 किलोमीटर और लागत लगभग ₹8.9 लाख दर्शाई गई है।

कार्य 09 जनवरी 2020 को प्रारंभ हुआ और 09 नवंबर 2021 को पूर्ण बताया गया। निर्माण एजेंसी एम/एस अरोड़ा द्वारा सड़क पर 5 वर्ष की गारंटी दी गई है, जबकि कार्य के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी कार्यपालन अभियंता श्री डी.पी. भूआर्य पर थी। क्रियान्वयन विभाग — पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन।

🚧 गारंटी पीरियड में भी सड़क जर्जर

सड़क में गड्ढा

हैरत की बात यह है कि सड़क अब भी गारंटी अवधि में होने के बावजूद उसकी स्थिति अत्यंत खराब है। मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, कई स्थानों पर सड़क की सतह पूरी तरह टूट गई है और बरसात के समय जलभराव से स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।

⚠️ ग्रामीणों के अनुसार अब तक कई सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। दोपहिया वाहन सवार गिरकर घायल हुए, जबकि चारपहिया वाहन भी गड्ढों में फंस जाते हैं। इसके बावजूद मेंटेनेंस के नाम पर कोई कार्य नहीं किया गया।

Lamps जाने वाली चौक

📜 नियमों की अनदेखी?

PMGSY के दिशा-निर्देश स्पष्ट करते हैं कि निर्माण के बाद निर्धारित गारंटी अवधि में सड़क का संपूर्ण रख-रखाव ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है। ऐसी स्थिति में मरम्मत न होना न केवल संविदा शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि विभागीय निगरानी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

🧾 भ्रष्टाचार के आरोप, जिम्मेदारी तय कौन करेगा?

ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के चलते ठेकेदार खुलेआम मनमानी कर रहा है। शिकायतों के बावजूद न तो मरम्मत कार्य शुरू कराया गया, न ही गारंटी शर्तों के तहत कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सड़क गारंटी अवधि में रहते हुए भी दुर्घटनाओं का कारण बन रही है, तो इसकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

📢 ग्रामीणों की मांग

  • PMGSY सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए
  • गारंटी क्लॉज के तहत ठेकेदार से कार्य कराया जाए
  • निर्माण व मेंटेनेंस की तकनीकी जांच हो
  • दोषी ठेकेदार व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो

यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। किसी भी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और ठेकेदार की होगी।

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