
बस्तर से उठा सवाल — DMFT–CSR फंड आखिर जाता किसकी जेब में?
छत्तीसगढ़ / जगदलपुर। देश के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों एवम् नवरत्न में शामिल NMDC (National Mineral Development Corporation) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक वीर आदिवासी क्रांतिकारी गुंडाधुर जयंती (भूमकाल दिवस) कार्यक्रम को लेकर NMDC नगरनार स्टील लिमिटेड द्वारा सहयोग से इनकार किए जाने के बाद यह मुद्दा अब राष्ट्रीय विमर्श का विषय बनता जा रहा है।
ST-SC-OBC-Minority समाजों का आरोप है कि जिन इलाकों की जमीन और संसाधनों से NMDC उत्पादन कर रही है, वहीं के मूल निवासियों की संस्कृति, इतिहास और सामाजिक आयोजनों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
पूरा मामला क्या है?
सर्व समाज प्रतिनिधियों के अनुसार, बस्तर संभाग के विभिन्न समाज प्रमुखों ने संयुक्त रूप से NMDC नगरनार स्टील लिमिटेड प्रबंधन से मुलाकात कर 10 फरवरी को आयोजित भूमकाल दिवस कार्यक्रम के लिए औपचारिक आमंत्रण और सहयोग का अनुरोध किया था।

आरोप है कि NMDC के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह कहकर सहयोग से इनकार कर दिया कि स्टील प्लांट घाटे में चल रहा है और आर्थिक स्थिति अनुकूल नहीं है। लोन लेकर कर्मचारियों को तनख्वाह दे रहे हैं?ये बात खूब ए डी जी म श्री बाब जी कही
St SC ओबीसी और सभी जिलों से आए समाज प्रमुख ने आरोप लगाया है ऐसे अधिकारी को हटाना चाहिए जो यहां समाज और प्रमुखों की अनदेखी करे
NMDC k Adgm aur ED पर आउटसोर्सिंग एम्प्लॉयमेंट टेंडर मनमाने तरीके से बांटने के आरोप सर्व आदिवासी समाज प्रमुख श्री प्रकाश ठाकुर कहा अब NMDC और पूरा सर्व समाज बस्तर संभाग आमने सामने हैं?बहुत जल्द बहुत बड़ा आंदोलन होगा?


प्रबंधन पर टालमटोल का आरोप
समाज प्रमुखों का कहना है कि जब उन्होंने NMDC के शीर्ष अधिकारियों से संवाद स्थापित करने की कोशिश की, तो “मीटिंग में हैं”, “उपलब्ध नहीं हैं” जैसे जवाब देकर उन्हें बार-बार टाल दिया गया।
सबसे बड़ा राष्ट्रीय सवाल
जब खनन प्रभावित जिलों के लिए हर साल करोड़ों रुपये का DMFT और CSR फंड स्वीकृत होता है,
तो वह फंड आखिर जाता कहाँ है?
यदि DMFT और CSR फंड वास्तव में स्थानीय विकास, आदिवासी कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए है, तो फिर भूमकाल दिवस जैसे ऐतिहासिक आयोजन के लिए सहयोग से इनकार क्यों?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल बस्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के सभी खनन प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में DMFT–CSR फंड की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है।
समाजों की चेतावनी
- DMFT–CSR फंड का सार्वजनिक और पारदर्शी हिसाब
- स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता
- सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आयोजनों में सामाजिक भागीदारी
मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को बस्तर से राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की चेतावनी दी गई है।
राष्ट्रीय महत्व क्यों?
- NMDC एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (PSU)
- मामला आदिवासी अधिकार और संसाधन न्याय से जुड़ा
- DMFT–CSR फंड सीधे नीति और प्रशासनिक जवाबदेही से संबंधित
रिपोर्ट: ओम साहू
Editor-in-Chief | The Eagle 🦅 Eye 👁️ News
संपर्क: 9926750985

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