जगदलपुर | 7 फरवरी 2026
रिपोर्ट: ओम साहू
जगदलपुर का ऐतिहासिक लालबाग मैदान बस्तर पण्डुम के आगाज़ के साथ ही लोक-संस्कृति के विशाल संगम में तब्दील हो गया। तीन दिवसीय इस भव्य महोत्सव के प्रथम दिवस पर जैसे ही विभिन्न राज्यों के नर्तक मंच पर उतरे, बस्तर की फिजाओं में पूरे भारत की मिट्टी की खुशबू घुल गई। आयोजन की पहली शाम पूरी तरह अंतरराज्यीय जनजातीय लोकनृत्यों के नाम रही—जहाँ विविधता में एकता की सजीव तस्वीर देखने को मिली।
✨ सांस्कृतिक संध्या के प्रमुख आकर्षण
मध्य प्रदेश के कलाकारों का ‘गुदुम बाजा नाच’ — वाद्य यंत्रों की थाप ने माहौल में ऊर्जा भर दी।





आंध्र प्रदेश की ‘डिमसा’ — सामूहिक पद-संचालन और लयबद्ध गतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
तेलंगाना का ‘लम्बाड़ी’ और कर्नाटक का ‘बंजारा’ — चटक, रंग-बिरंगी वेशभूषा व पारंपरिक आभूषणों की खनक से लालबाग मैदान और जगमगा उठा।
महाराष्ट्र का ‘लिंगो नाच’ — परंपरा, आस्था और कला का अद्भुत संगम, जिस पर देर तक तालियां गूंजती रहीं।
इन प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि भाषा और क्षेत्र अलग हो सकते हैं, पर सुर-ताल और भावनाओं की भाषा एक है। भारी दर्शक-उपस्थिति और उत्साहपूर्ण प्रतिक्रियाओं ने पहले दिन को यादगार बना दिया, जिससे आने वाले दो दिनों के प्रति उत्सुकता और बढ़ गई।
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संपादक: Om Sahu | संपर्क: 9926750985
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