रिपोर्ट: ओम साहू
जगदलपुर। बस्तर संभाग में इन दिनों एक ऐसी शारीरिक-मानसिक समस्या तेजी से देखी जा रही है, जिसे सामान्य घबराहट समझकर अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। चिकित्सकीय भाषा में इसे “सिस्टमिक ऑटोनॉमिक ओवर-एक्टिवेशन” कहा जाता है।
डॉ. ओ. पी. साहू के अनुसार यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब शरीर का “फाइट-ऑर-फ्लाइट” तंत्र आवश्यकता से अधिक सक्रिय हो जाता है और बिना वास्तविक खतरे के भी शरीर को आपातकालीन अवस्था में पहुँचा देता है।
📌 बस्तर में बढ़ने के प्रमुख कारण
- लगातार मानसिक तनाव, बेरोज़गारी और आर्थिक दबाव
- नींद की कमी और मोबाइल/स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग
- अत्यधिक चाय-कॉफी, तंबाकू और शराब का सेवन
- गर्म व आर्द्र मौसम, डिहाइड्रेशन
- महिलाओं में थायरॉइड विकार
- आदिवासी क्षेत्रों में एनीमिया (खून की कमी)
- मलेरिया व मौसमी वायरल संक्रमण
⚠️ प्रमुख लक्षण
- आराम की अवस्था में भी दिल की धड़कन 100+ प्रति मिनट
- रक्तचाप बढ़ना
- घबराहट, बेचैनी, पसीना आना
- हाथ कांपना, चक्कर आना
- सांस फूलना, नींद न आना
- पेट में गड़बड़ी
कई मरीजों को लगता है कि उन्हें हृदय रोग हो गया है, जबकि वास्तविक कारण स्वायत्त तंत्रिका तंत्र का असंतुलन होता है। डर की भावना ही समस्या को और भड़का देती है।
💊 उपचार और जांच
डॉ. साहू के अनुसार बिना चिकित्सकीय सलाह दवा न लें। आवश्यकता अनुसार:
- हृदयगति नियंत्रित करने हेतु प्रोप्रानोलोल / मेटोप्रोलोल
- सिम्पेथेटिक गतिविधि कम करने हेतु क्लोनिडिन
- चिंता विकार में फ्लूऑक्सेटीन (SSRI)
- जांच: TSH, CBC, BP मॉनिटरिंग, मलेरिया टेस्ट
🌿 प्राकृतिक और जीवनशैली उपाय
- प्रतिदिन 10-15 मिनट 4-7-8 ब्रीदिंग, अनुलोम-विलोम
- 7-8 घंटे नियमित नींद
- चाय-कॉफी और नशे से दूरी
- प्रतिदिन 30 मिनट टहलना
- ढाई से तीन लीटर पानी का सेवन
जीवनशैली सुधार से 70-80% तक नियंत्रण संभव है।
🚨 कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?
- धड़कन 120 से अधिक
- रक्तचाप 160/100 से ऊपर
- छाती में दर्द
- बेहोशी की स्थिति
यह केवल मानसिक समस्या नहीं, बल्कि शरीर और मन के असंतुलन का संयुक्त परिणाम है। समय पर पहचान और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इस बढ़ती समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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संपादक: Om Sahu
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