रिपोर्ट: ओम साहू
बस्तर। स्थानांतरण आदेशों की अवहेलना को लेकर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन के खिलाफ सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला बस्तर की जिला अध्यक्ष रीमा दानी एवं प्रांतीय महामंत्री हनुमंत राव ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।

पत्र में बताया गया है कि महारानी अस्पताल जगदलपुर में पदस्थ स्टाफ नर्स वर्षा पॉल का प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कापानार किया गया था। इसके बाद सिविल सर्जन सह अधीक्षक महारानी अस्पताल द्वारा उन्हें विधिवत रूप से कार्य मुक्त भी कर दिया गया।



लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्य मुक्त होने के बाद भी संबंधित कर्मचारी ने अपने नए स्थानांतरण स्थल पर जॉइनिंग नहीं दी और पूर्व पदस्थापना स्थल महारानी अस्पताल में ही उपस्थिति दर्ज कराती रही। इतना ही नहीं, उच्च अधिकारियों द्वारा उनसे कार्य भी लिया जा रहा है।
संघ की जिला अध्यक्ष रीमा दानी ने पत्र में लिखा कि कार्य मुक्त होने के बाद बिना शासन द्वारा आदेश निरस्त किए किसी कर्मचारी से पुराने स्थान पर कार्य लेना स्थानांतरण नीति के विरुद्ध है और यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ पूर्व में भी विभाग में कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं से संरक्षण प्राप्त है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि 25 अप्रैल 2023 को छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवा संचालक द्वारा एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया था, जिसका विषय था “संलग्नीकरण समाप्त करना”। इस आदेश को प्रदेश के सभी संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवा और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को भेजा गया था।
आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो एकतरफा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे।
लेकिन इतने गंभीर आदेश के बावजूद प्रदेश के कई जिलों में इसका कड़ाई से पालन नहीं हो रहा। अभी तक सभी जिलों और संभागों से संचालकालय तक इसकी सही जानकारी और क्रियान्वयन भी नहीं पहुंचा है।
“ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे अधिकारी और कर्मचारी अंगद की तरह पैर जमाए बैठे हैं और अपने मूल पदस्थापना स्थल पर जाने को तैयार ही नहीं हैं।”
संघ ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यह स्थिति कुछ वैसी ही लग रही है जैसे इंद्र के सफेद हाथी ऐरावत की कहानी — जिसका नाम तो सबने सुना, लेकिन देखा किसी ने नहीं। ठीक उसी तरह आदेश तो जारी हो गया, लेकिन उसका पालन कहीं दिखाई नहीं दे रहा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या स्थानांतरण नीति का पालन सुनिश्चित किया जाएगा या फिर आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।
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संपादक: Om Sahu
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