⚠️ विधानसभा सत्र में फिर उठा बड़ा विवाद: IPS रतन लाल डांगी पर कार्रवाई की मांग, पुलिस परिवार आंदोलन की तैयारी

रिपोर्ट: ओम साहू

छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। जहां विधानसभा का बजट सत्र पहले से ही विभिन्न मुद्दों को लेकर गर्म है, वहीं अब आईपीएस रतन लाल डांगी से जुड़ा मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।

पीड़िता ने इस बार न्याय पाने के लिए संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ का दरवाजा खटखटाया है और संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।

📩 पीड़िता ने पत्र में सुनाई अपनी आपबीती

पीड़िता ने अपने पत्र में बताया कि किस प्रकार उनका शारीरिक, आर्थिक और मानसिक शोषण किया गया। पत्र मिलते ही संगठन के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री तथा पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक के समक्ष आई.जी.पी. रतन लाल डांगी के खिलाफ शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण की शिकायत दर्ज करवाई थी।

इस शिकायत की जांच के लिए समिति भी गठित की गई थी, जिसने 28 अक्टूबर 2025 और 03 नवंबर 2025 को पीड़िता के बयान दर्ज किए। लेकिन कई महीनों बाद भी अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

⚠️ दबाव बनाने के आरोप

संघ का आरोप है कि वर्तमान में आई.जी.पी. रतन लाल डांगी अपने पद और प्रभाव का उपयोग कर पीड़िता पर शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं ।

संगठन ने यह भी कहा कि यदि किसी आरक्षक से निरीक्षक स्तर के पुलिसकर्मी पर ऐसा आरोप होता तो अब तक एकतरफा कार्रवाई कर सजा दी जा चुकी होती।

⚖️ बड़े अधिकारी और छोटे कर्मचारियों में भेदभाव का आरोप

संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ का कहना है कि इतने महीनों तक कार्रवाई न होना पुलिस विभाग में बड़े अधिकारियों और छोटे कर्मचारियों के बीच असमानता और भेदभाव को दर्शाता है।

संगठन ने मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आई.जी.पी. रतन लाल डांगी को तत्काल सेवा से पृथक कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

🚨 7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन

संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने स्पष्ट कहा है कि यदि 7 दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ आंदोलन का रास्ता अपनाएगा और अपनी बात विधानसभा तक पहुंचाएगा।

यदि पुलिस परिवार विधानसभा तक जाता है या जाने का प्रयास करता है तो विधानसभा का यह बजट सत्र और भी ज्यादा गर्म हो सकता है।


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