
रिपोर्ट: द ईगल आई न्यूज़ | जगदलपुर
जगदलपुर, 1 अगस्त 2026। बस्तर पंडुम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि सुशील मौर्य ने राज्य सरकार पर बस्तर पंडुम के नाम पर भ्रष्टाचार करने और आदिवासी समाज को केवल प्रचार का माध्यम बनाने का आरोप लगाया है।
जारी बयान में सुशील मौर्य ने कहा कि बस्तर पंडुम आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और आस्था से जुड़ा पर्व है, न कि किसी सरकार का आयोजन। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस सांस्कृतिक आयोजन को आत्मप्रचार का माध्यम बना दिया है।
“आदिवासियों को राष्ट्रपति से मिलाइए, दिल्ली, मुंबई या विदेश घुमाइए, हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन इससे क्या युवाओं को रोजगार मिलेगा? क्या स्वास्थ्य और शिक्षा की समस्याएं दूर हो जाएंगी?”– सुशील मौर्य
6.14 करोड़ रुपये खर्च पर उठाए सवाल
मौर्य ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति और केंद्रीय गृहमंत्री के दौरे के दौरान टेंट, कुर्सी और पंडाल सहित अन्य व्यवस्थाओं पर 6 करोड़ 14 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए। उनका दावा है कि यही राशि बस्तर के विकास कार्यों, टूटी सड़कों, पुल-पुलियों तथा स्थायी संरचनाओं के निर्माण में खर्च की जा सकती थी।
शिक्षा, रोजगार और विकास की मांग
सुशील मौर्य ने कहा कि आदिवासी समाज को दिखावे की राजनीति नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं और समान अवसर चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासी समाज को केवल “नुमाइश का सामान” बनाकर रखना चाहती है, जबकि बस्तर के युवा आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं।
पूर्व आयोजनों में भी घोटाले के लगाए आरोप
उन्होंने दावा किया कि इससे पहले बस्तर ओलंपिक में ट्रैक सूट खरीद तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए खरीदे गए सुरक्षा जूतों में भी अनियमितताएं हुई थीं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायतों के विकास कार्यों के लिए धन की कमी बताई जाती है, जबकि वीआईपी दौरों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।
“सरकार बस्तरवासियों के नाम पर घोटाले करना बंद करे और आदिवासी समाज के वास्तविक विकास की योजनाएं बनाए।”– सुशील मौर्य
नोट: यह समाचार सुशील मौर्य द्वारा जारी बयान पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोप उनके व्यक्तिगत दावे हैं। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।

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