बस्तर जिला दवा विक्रेता संघ चुनाव पर गंभीर सवाल: दुर्गा गुप्ता का प्रदेश संगठन के नाम खुला पत्र

जगदलपुर। बस्तर जिला दवा विक्रेता संघ के हालिया चुनाव को लेकर उठ रहे सवालों के बीच दुर्गा गुप्ता ने प्रदेश संगठन के नाम एक खुला पत्र जारी करते हुए चुनावी प्रक्रिया, संभावित प्रतिद्वंद्वियों को बाहर किए जाने के आरोप और संगठनात्मक जिम्मेदारियों पर स्पष्ट जवाब मांगा है।


दुर्गा गुप्ता ने अपने पत्र में कहा कि चुनाव किसी व्यक्ति या टीम को सत्ता में लाने का माध्यम नहीं, बल्कि संगठन के प्रत्येक सदस्य को समान अवसर देने वाली लोकतांत्रिक प्रक्रिया होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी संभावित प्रतिद्वंद्वी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करके चुनाव कराया गया है, तो इससे चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।

सबसे बड़ा सवाल—क्या संगठन में नियम व्यक्ति से बड़े हैं या व्यक्ति नियम से बड़ा है?

प्रदेश संगठन से पूछे गए 12 सीधे सवाल

1. चुनावी प्रक्रिया कहाँ है?

क्या बस्तर जिला दवा विक्रेता संघ के चुनाव में निर्धारित नियमों और चुनावी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया? यदि हाँ, तो उसे स्पष्ट रूप से सामने क्यों नहीं रखा जा रहा है?

2. प्रतिद्वंद्वी को बाहर करना किस नियम के तहत?

क्या किसी संभावित प्रतिद्वंद्वी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करके उसके बाद चुनाव कराना लोकतांत्रिक एवं निष्पक्ष चुनाव माना जा सकता है?

3. प्रदेश संगठन की मान्यता पर सवाल

यदि ऐसी प्रक्रिया के बावजूद चुनाव को मान्यता दी जाती है, तो क्या प्रदेश संगठन स्वयं ऐसी गलत परंपरा को स्थापित नहीं कर रहा है?

4. क्या यही नियम सभी जिलों में लागू होगा?

यदि बस्तर में किसी प्रतिद्वंद्वी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने के बाद चुनाव स्वीकार्य है, तो क्या भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों में भी यही व्यवस्था लागू होगी?

5. आज बस्तर है, कल कोई और जिला होगा

आज यदि किसी एक टीम के पक्ष में यह प्रक्रिया स्वीकार की गई, तो कल यही प्रक्रिया किसी दूसरी टीम या किसी दूसरे जिले में अपनाई जाएगी। उस समय प्रदेश संगठन के पास इसे गलत कहने का नैतिक आधार क्या रहेगा?

6. अध्यक्ष की जिम्मेदारी क्या है?

जो अध्यक्ष महोदय हर विषय पर स्वयं पत्र लिखने के लिए आगे रहते हैं, क्या बस्तर जिले में हुई कथित चुनावी अनियमितता पर भी वे स्वयं स्पष्ट पत्र जारी करेंगे?

7. महासचिव की भूमिका कहाँ है?

यदि महासचिव के अधिकार क्षेत्र के विषयों पर भी अध्यक्ष निर्णय और पत्राचार करेंगे, तो फिर महासचिव की वास्तविक जिम्मेदारी क्या रह जाती है?

8. संगठन सचिव का कार्यक्षेत्र क्या है?

संगठन सचिव का मूल दायित्व संगठन को मजबूत करना और संगठनात्मक विषयों को देखना है। यदि वे WhatsApp संदेशों के माध्यम से फार्मेसी की अनियमितताओं को मुद्दा बनाकर जिलों के मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं, तो क्या यह CCDA की निर्धारित कार्यप्रणाली है?

9. जिम्मेदारी तय कौन करेगा?

यदि अध्यक्ष, महासचिव और संगठन सचिव—तीनों के दायित्वों को लेकर ही प्रश्न उठ रहे हैं, तो क्या प्रदेश संगठन इस व्यवस्था की समीक्षा करेगा?

10. केमिस्ट साथियों का हित कहाँ है?

संगठन का उद्देश्य आपसी विवाद बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश के दवा विक्रेताओं के हितों की रक्षा करना होना चाहिए। क्या वर्तमान कार्यप्रणाली वास्तव में केमिस्ट साथियों के हित में है?

11. प्रदेश कार्यकारिणी में नया नाम भेजने की जल्दबाजी क्यों?

CCDA के चुनाव के बाद प्रदेश कार्यकारिणी में नया नाम भेजने का निर्णय किस आधार पर लिया गया है? जब अधिकांश जिलों में चुनाव की प्रक्रिया स्वयं लंबित है, तब इस निर्णय की आवश्यकता और औचित्य क्या है?

12. नए नाम का कार्यकाल कितना होगा?

यदि अगले 4–6 महीनों में संबंधित जिलों के चुनाव होने हैं, तो अभी प्रदेश कार्यकारिणी में भेजा जाने वाला नया नाम आगामी चुनाव तक रहेगा या पूरे तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए? इस विषय पर स्पष्ट नियम और लिखित निर्णय सामने आना चाहिए।


क्या केवल चेहरे बदले हैं या व्यवस्था भी बदली है?

खुले पत्र में कहा गया है कि पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि एक बड़े मतदाता समूह को मतदान से वंचित करके सत्ता में आने की कोशिश की जाती रही है। यदि आज भी किसी अलग तरीके से वही स्थिति दिखाई दे रही है, तो फिर बदलाव के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

“क्या संगठन में केवल चेहरे बदले हैं या व्यवस्था भी बदली है?”

दुर्गा गुप्ता का कहना है कि किसी संभावित प्रतिद्वंद्वी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करके चुनाव जीतना घोर अनैतिक और लोकतांत्रिक भावना के विरुद्ध है।

खुले पत्र में उठाए गए मुख्य सवाल

  • क्या चुनाव निष्पक्ष था?
  • क्या सभी मतदाताओं को समान अधिकार मिला?
  • क्या सभी संभावित प्रत्याशियों को समान अवसर मिला?
  • क्या नियम सभी के लिए समान थे?
  • क्या प्रदेश संगठन इन नियमों को भविष्य में सभी जिलों में समान रूप से लागू करेगा?

पत्र में कहा गया है कि यदि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह सही थी तो उसे सार्वजनिक रूप से सामने रखने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वहीं, यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसे स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि संगठन की मजबूती का प्रमाण होगा।

“संगठन व्यक्ति और पद से बड़ा है”

दुर्गा गुप्ता ने प्रदेश संगठन से निष्पक्षता के साथ बस्तर चुनाव प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने और पूरे मामले की स्थिति संगठन के सामने स्पष्ट करने की अपेक्षा जताई है।

वासु भैया, संगठन किसी व्यक्ति, पद या टीम से बड़ा होता है।

उन्होंने कहा कि आज यदि किसी गलत परंपरा को रोकने के बजाय उसे मान्यता दे दी गई तो भविष्य में यही प्रक्रिया किसी भी जिले में किसी भी साथी के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती है।

स्पष्ट जवाब की अपेक्षा

खुले पत्र के अंत में प्रदेश संगठन से कहा गया है कि बस्तर चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर निष्पक्षता से पुनर्विचार किया जाए और संगठन के सामने स्थिति स्पष्ट की जाए।

क्योंकि सवाल सिर्फ बस्तर के चुनाव का नहीं है। सवाल यह है कि आने वाले समय में संगठन के चुनाव नियमों से होंगे या सुविधानुसार बनाए गए समीकरणों से।

“संगठन बचेगा तो हम सब बचेंगे। व्यक्ति आते-जाते रहेंगे, लेकिन संगठन की लोकतांत्रिक परंपरा कायम रहनी चाहिए।”


नोट: यह समाचार/लेख खुले पत्र में व्यक्त सवालों और आरोपों पर आधारित है। संबंधित पक्षों का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जा सकता है।


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