
सांसद महेश कश्यप और विधायक किरण देव से 6 सीधे सवाल | MOU की ₹20 लाख राशि, किसानों के मुआवजे और प्रदूषण पर कांग्रेस ने मांगा जवाब
नागरनार। दलपत सागर के साफ-सफाई एवं कायाकल्प के लिए NMDC के CSR मद से ₹50 लाख दिए जाने के बाद नागरनार में CSR को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। नागरनार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष संतोष सेठिया ने सवाल उठाया है कि जब NMDC दलपत सागर के लिए CSR राशि दे सकती है, तो जिस क्षेत्र में NMDC का विशाल स्टील प्लांट स्थापित है, उन प्रभावित गांवों के विकास के लिए पर्याप्त CSR राशि क्यों नहीं दी जा रही?
सेठिया का सवाल है—आखिर नागरनार के ग्रामीणों का कसूर क्या है?
🔥 एक तरफ ₹50 लाख, दूसरी तरफ प्रभावित गांवों की शिकायतें
संतोष सेठिया के अनुसार नागरनार और आसपास के ग्रामीण वर्षों से धूल, धुएं, प्रदूषण, भारी वाहनों की आवाजाही और अन्य औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्र के स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, पर्यावरण और अन्य बुनियादी विकास कार्यों के लिए CSR की पर्याप्त राशि उपलब्ध कराने की मांग उठ रही है।
📌 MOU के तहत मिलने वाली ₹20 लाख की राशि कहां गई?
प्रभावित ग्राम पंचायतों के साथ हुए MOU के तहत विकास के लिए राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था का हवाला देते हुए कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि पूर्व में प्रत्येक प्रभावित ग्राम पंचायत को ₹20 लाख की राशि दिए जाने की बात थी, तो वर्तमान में यह राशि क्यों बंद है?
कांग्रेस की मांग है कि सरकार और NMDC इस व्यवस्था की वर्तमान स्थिति तथा भुगतान बंद होने के कारणों को सार्वजनिक करें।
🌾 खेतों में काला पानी आने की शिकायत, मुआवजा कब?
नागरनार क्षेत्र के किसानों की ओर से खेतों में काला पानी आने की शिकायतों का मुद्दा भी उठाया गया है। संतोष सेठिया ने सवाल किया कि जिन किसानों का मुआवजा लंबित है, उन्हें भुगतान कब मिलेगा और उनकी जमीन एवं फसल को हुए संभावित नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- काला पानी आने की शिकायतों पर क्या जांच हुई?
- प्रभावित किसानों के लंबित मुआवजे का भुगतान कब होगा?
- फसल और जमीन को हुए नुकसान का आकलन किसने किया?
- प्रदूषण की रोकथाम के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए?
🎭 बस्तर के मेले-मड़ई की सहायता भी बंद क्यों?
कांग्रेस ने बस्तर की पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मेले-मड़ई के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद होने का भी मुद्दा उठाया है। सेठिया का कहना है कि बस्तर की संस्कृति को बढ़ावा देने की बात करने वाली सरकार को पारंपरिक आयोजनों के लिए मिलने वाले सहयोग की स्थिति भी स्पष्ट करनी चाहिए।
❓ सांसद और विधायक से 6 सीधे सवाल
- सांसद महेश कश्यप नागरनार और प्रभावित गांवों के लिए पर्याप्त CSR राशि दिलाने के लिए अब तक क्या ठोस पहल कर चुके हैं?
- विधायक किरण देव ने प्लांट प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को सरकार और NMDC प्रबंधन के सामने कितनी मजबूती से उठाया?
- MOU के तहत प्रभावित ग्राम पंचायतों को मिलने वाली ₹20 लाख की राशि वर्तमान में क्यों बंद है?
- लंबित किसान मुआवजे के भुगतान के लिए क्या कार्रवाई की गई?
- प्रदूषण, धूल और धुएं से प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है और NMDC केंद्र सरकार के अधीन है, तो प्रभावित ग्रामीणों के विकास में अड़चन आखिर किसकी है?
💰 CSR जनता के विकास के लिए या सरकारी आयोजनों के लिए?
संतोष सेठिया ने CSR राशि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विभिन्न सरकारी आयोजनों, प्रचारात्मक गतिविधियों और VIP व्यवस्थाओं में CSR राशि के उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार और NMDC CSR फंड के उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करें—कहां, कितना और किस उद्देश्य से CSR राशि खर्च की गई?
“CSR की प्राथमिकता प्रभावित जनता है या सरकार का प्रचार?”
🚂 “यह कैसी डबल इंजन सरकार है?”
संतोष सेठिया ने केंद्र और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार होने का हवाला देते हुए सवाल किया कि जब दोनों स्तरों पर एक ही दल की सरकार है, तब भी नागरनार के ग्रामीण अपने अधिकार, मुआवजे, बुनियादी सुविधाओं और प्रदूषण से राहत के लिए क्यों भटक रहे हैं?
“इंजन दो हैं, लेकिन नगरनार के विकास की गाड़ी आखिर चल क्यों नहीं रही?”
🏭 उद्योग के विरोध में नहीं, जनता के अधिकार के लिए लड़ाई
नगरनार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध उद्योग या विकास से नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि जिस क्षेत्र में इतना बड़ा सरकारी उद्योग स्थापित हुआ है, वहां रहने वाली जनता को भी विकास, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल और पर्यावरण सुरक्षा का उचित अधिकार मिलना चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार, प्रशासन और NMDC से प्रभावित गांवों के विकास, CSR राशि, MOU के तहत ग्राम पंचायतों की राशि, प्रदूषण नियंत्रण और किसानों के लंबित मुआवजे पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
⚠️ कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
संतोष सेठिया ने कहा कि यदि जल्द ही प्रभावित गांवों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो नागरनार ब्लॉक कांग्रेस कमेटी जनता को साथ लेकर आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो ढोल-नगाड़े बजाकर सांसद, विधायक और जिम्मेदार अधिकारियों को “कुंभकर्णी नींद” से जगाया जाएगा।
अब सवाल सिर्फ CSR का नहीं है—सवाल नगरनार की जनता के अधिकार, किसानों के मुआवजे, प्रभावित ग्राम पंचायतों के हक और बस्तर के सम्मान का है।
बयान: संतोष सेठिया, ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी नागरनार
नोट: CSR राशि, MOU भुगतान, मुआवजा तथा अन्य आरोपों/दावों पर संबंधित NMDC, प्रशासन, सांसद एवं विधायक का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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