पति की मौत के बाद भी नहीं मिली पेंशन! गुम सेवा पुस्तिका ने बढ़ाई परेशानी, पत्नी ने लगाई कार्रवाई की गुहार

सरकारी स्कूल के सहायक ग्रेड-2 स्व. रघुराज दास की सेवा पुस्तिका गुम होने का मामला, कई कार्यालयों तक पहुंची शिकायत
जगदलपुर/बकावंड, 10 सितम्बर 2026। बस्तर जिले में सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को पेंशन और अन्य सेवा लाभ मिलने में कथित प्रशासनिक अड़चन का मामला सामने आया है। स्व. रघुराज दास, सहायक ग्रेड-2, शासकीय हाई स्कूल चितालूर, विकासखंड बकावंड की मृत्यु 15 अप्रैल 2025 को हुई थी। उनकी पत्नी श्रीमती सुप्रिया दास ने आरोप लगाया है कि पति की मूल सेवा पुस्तिका गुम होने के कारण पेंशन संबंधी प्रक्रिया प्रभावित हुई और उन्हें अब तक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
🚨 मामला क्या है?
शिकायत में श्रीमती सुप्रिया दास ने बताया है कि उनके पति स्व. रघुराज दास की सेवा पुस्तिका कार्यालयीन रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि सेवा पुस्तिका के गुम होने को लेकर विभागीय स्तर पर सूचना और पुलिस में प्राथमिक सूचना दर्ज कराने की प्रक्रिया की गई।
📌 पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सेवा पुस्तिका उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके पति की मृत्यु के बाद मिलने वाले पेंशन संबंधी लाभ में देरी हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले को लेकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है और जिम्मेदार कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जा रही है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि पेंशन संबंधी प्रक्रिया के लिए द्वितीय सेवा पुस्तिका तैयार किए जाने तथा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को लेकर संबंधित कार्यालयों से पत्राचार किया गया, लेकिन समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो सका।
📄 दस्तावेजों में क्या सामने आया?
- स्व. रघुराज दास सहायक ग्रेड-2 के पद पर शासकीय हाई स्कूल चितालूर में कार्यरत थे।
- दस्तावेजों के अनुसार उनकी मृत्यु 15 अप्रैल 2025 को हुई।
- मृत्यु के बाद मूल सेवा पुस्तिका उपलब्ध नहीं होने की बात विभागीय पत्रों में सामने आई।
- सेवा पुस्तिका गुम होने के संबंध में पुलिस थाने में प्राथमिक सूचना दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
- मामले को लेकर जिला शिक्षा विभाग सहित उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया।
- राज्यपाल सचिवालय तक भी शिकायत पहुंचने का दस्तावेज उपलब्ध है।
🕵️♂️ पुलिस तक भी पहुंचा मामला
उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक सेवा पुस्तिका गुम होने की प्राथमिक सूचना दर्ज कराने के लिए संबंधित शासकीय हाई स्कूल के प्राचार्य द्वारा थाना नगरनार को पत्र भेजा गया। इसके बाद पुलिस स्तर पर भी मामले की सूचना दर्ज होने का दस्तावेज सामने आया है।
यानी मामला केवल विभागीय पत्राचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेवा पुस्तिका के गुम होने का मामला पुलिस रिकॉर्ड तक भी पहुंचा।
🏛️ राज्यपाल सचिवालय ने भी लिया संज्ञान
इस मामले में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज राज्यपाल सचिवालय से जारी पत्र है। दिनांक 30 दिसंबर 2025 के पत्र में शिकायत को संबंधित विभाग को भेजते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर कृत कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने बाद में 30 अगस्त 2026 को विधायक सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष फिर अपनी शिकायत रखी और मामले में जिम्मेदार कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई तथा पेंशन संबंधी समस्या का समाधान कराने की मांग की।
❓ सबसे बड़ा सवाल
एक दिवंगत सरकारी कर्मचारी की सेवा पुस्तिका आखिर कहां गई?
यदि मूल सेवा पुस्तिका उपलब्ध नहीं है तो उसके संरक्षण और रिकॉर्ड संधारण की जिम्मेदारी किसकी थी? और सेवा पुस्तिका के अभाव में परिवार को मिलने वाले पेंशन एवं अन्य लाभ में हुई देरी के लिए जवाबदेही किसकी तय होगी?
⚖️ शिकायतकर्ता की मांग
श्रीमती सुप्रिया दास ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि उनके पति की सेवा पुस्तिका के गुम होने के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाए तथा उनके परिवार को नियमानुसार पेंशन एवं अन्य सेवा लाभ दिलाने की कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए।
दस्तावेजों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि सेवा पुस्तिका को लेकर विभागीय स्तर पर पत्राचार, पुलिस को सूचना और उच्च अधिकारियों तक शिकायत की प्रक्रिया हुई है। हालांकि सेवा पुस्तिका गुम होने के लिए अंतिम रूप से कौन जिम्मेदार है, यह जांच और विभागीय कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध शिकायत पत्रों एवं शासकीय दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के पक्ष के हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित विभागीय जांच अथवा सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष के बाद ही मानी जाएगी।
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सवाल वही, जो व्यवस्था से जवाब मांगें।

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