8 साल से दुर्गंध से परेशान ग्रामीण! BDF फैक्ट्री की संयुक्त वैज्ञानिक जांच की मांग, आउटलेट के लाइसेंस भी जांच के घेरे में

रिपोर्ट: ओम साहू

जगदलपुर, बस्तर। बोरपदर स्थित BDF (बस्तर डेरी फार्म) की फैक्ट्री से कथित रूप से फैल रही दुर्गंध को लेकर ग्रामीणों की परेशानी एक बार फिर सामने आई है। ग्रामीणों का दावा है कि समस्या करीब 8 वर्षों से बनी हुई है। मामले को लेकर अविनाश सिंग गौतम ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर फैक्ट्री की संयुक्त एवं वैज्ञानिक जांच कराने तथा BDF के संबंधित आउटलेट के पंजीयन और लाइसेंस की जांच की मांग की है।

दुर्गंध की वैज्ञानिक जांच और पर्यावरणीय नमूनों की मांग

ज्ञापन में मांग की गई है कि बोरपदर स्थित BDF फैक्ट्री का संबंधित विभागों की संयुक्त टीम द्वारा स्थल निरीक्षण कराया जाए। साथ ही दुर्गंध अथवा संभावित प्रदूषण के स्रोत की वैज्ञानिक जांच की जाए। आवश्यकता होने पर वायु, जल और आसपास के पर्यावरण के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला से परीक्षण कराने की मांग की गई है।

BDF आउटलेट के पंजीयन और लाइसेंस भी जांच के दायरे में

अविनाश गौतम ने BDF द्वारा संचालित संबंधित आउटलेट के पंजीयन, लाइसेंस एवं आवश्यक अनुज्ञप्तियों की जांच की मांग की है। ज्ञापन में संबंधित विभागों के अभिलेखों की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि सभी आउटलेट नियमानुसार पंजीकृत और अधिकृत हैं या नहीं।

दूध और दुग्ध उत्पादों के सैंपल की भी जांच की मांग

ज्ञापन में फैक्ट्री में निर्मित दूध, दुग्ध उत्पाद एवं अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग के माध्यम से गुणवत्ता एवं सुरक्षा की जांच कराने की मांग भी की गई है।

8 वर्षों की शिकायतों का रिकॉर्ड खंगालने की मांग

ग्रामीणों की ओर से दावा किया गया है कि दुर्गंध की समस्या को लेकर पिछले करीब आठ वर्षों में कई बार शिकायतें की गई हैं। ज्ञापन में पूर्व में की गई शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड मंगाकर समीक्षा करने तथा यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि अब तक संबंधित विभागों द्वारा क्या कार्रवाई की गई।

किन विभागों की जांच की मांग?

  • BDF के संबंधित आउटलेट के पंजीयन और लाइसेंस की जांच।
  • बोरपदर फैक्ट्री का संबंधित विभागों की संयुक्त टीम से निरीक्षण।
  • दुर्गंध/संभावित प्रदूषण के स्रोत की वैज्ञानिक जांच।
  • आवश्यकता अनुसार वायु, जल एवं पर्यावरण के नमूनों की अधिकृत प्रयोगशाला से जांच।
  • दूध एवं दुग्ध उत्पादों के नमूनों की खाद्य सुरक्षा जांच।
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खाद्य सुरक्षा विभाग और स्थानीय निकाय से संबंधित अनुमतियों एवं अनुपालन की जांच।
  • पिछले आठ वर्षों की शिकायतों और कार्रवाई का रिकॉर्ड की समीक्षा।
  • जांच में नियम उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई।
  • ग्रामीणों को दुर्गंध एवं अन्य परेशानियों से स्थायी राहत के लिए सुधारात्मक कदम।
  • जांच और कार्रवाई की लिखित जानकारी शिकायतकर्ताओं को उपलब्ध कराने की मांग।

“समयबद्ध और निष्पक्ष जांच जरूरी” — अविनाश गौतम

अविनाश गौतम ने कहा कि ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही समस्या का अब समयबद्ध एवं निष्पक्ष निराकरण जरूरी है। उन्होंने जिला प्रशासन से जनहित में मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

नोट: फैक्ट्री या आउटलेट के संबंध में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित सरकारी जांच एवं अधिकृत रिपोर्ट से ही होगी।

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