अडावाल जमीन विवाद में नया खुलासा! सरकारी शिक्षक पर नाबालिग आदिवासी बच्चों से काम कराने का आरोप, बाहरी भूमाफियाओं की भूमिका पर सवाल

काम करते बच्चे और महिला

कई एकड़ जमीन के विवाद के बीच बच्चों से भुट्टा लगाने का काम कराने का आरोप! क्या बाल अधिकारों का हो रहा उल्लंघन? प्रशासन से जांच की मांग

जगदलपुर/अडावाल। बस्तर जिले के अडावाल में नेशनल हाईवे से लगी करीब 3 एकड़ जमीन को लेकर चल रहा विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा है। पहले जमीन पर कथित कब्जे, रास्ता बंद करने और पंचायत प्रतिनिधियों को धमकी देने के आरोप सामने आए थे। अब इस मामले में एक नया और संवेदनशील मुद्दा सामने आया है।

पीड़ित पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि विवादित जमीन पर भुट्टा लगाने के काम में नाबालिग आदिवासी बच्चों को लगाया जा रहा है। इस मामले में एक सरकारी शिक्षक की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, बच्चों की उम्र, काम की परिस्थितियों और संबंधित शिक्षक की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

🔴 क्या जमीन विवाद की आड़ में बच्चों से कराया जा रहा काम?

सामने आए वीडियो में एक खुले कृषि क्षेत्र में कई बच्चे और महिला लोग काम करते दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इन बच्चों से भुट्टा लगाने का काम करवाया जा रहा है। यदि बच्चे वास्तव में नाबालिग हैं और उनसे मजदूरी कराई जा रही है, तो यह बाल संरक्षण एवं श्रम कानूनों के तहत जांच का विषय है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चों को किसने काम पर लगाया? क्या उन्हें मजदूरी दी जा रही है? क्या वे स्कूल जाने की उम्र में खेतों में काम करने को मजबूर हैं? इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच से ही सामने आएगा।

🔴 सरकारी शिक्षक की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में एक सरकारी शिक्षक पर भी बच्चों से काम करवाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि किसी सरकारी कर्मचारी की इस गतिविधि में संलिप्तता सामने आती है तो शिक्षा विभाग को इसकी जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

हालांकि, संबंधित शिक्षक की भूमिका और आरोपों की सत्यता की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकती है। संबंधित व्यक्ति का पक्ष भी सामने आना आवश्यक है।

🔴 बाहरी लोगों की भूमिका और जमीन कब्जे का विवाद

गौरतलब है कि अडावाल में खसरा नंबर 15/1 के आसपास की जमीन और नेशनल हाईवे से लगी भूमि को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। पीड़ित देवनाथ यादव का आरोप है कि उनकी पीछे की जमीन तक पहुंचने का रास्ता बंद करने का प्रयास किया जा रहा है और जमीन को कम कीमत पर खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

पीड़ित पक्ष ने नेशनल हाईवे की जमीन के संबंध में पूर्व में मुआवजा प्राप्त किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए राजस्व रिकॉर्ड, अधिग्रहण दस्तावेज और मुआवजा भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच जरूरी है।

✊ ओबीसी महासभा ने संभाली कमान

मामले को लेकर ओबीसी महासभा के संभागीय अध्यक्ष श्री दिनेश यदु, रामेश्वर बिसाई और मीडिया प्रभारी ओम साहू ने पीड़ित देवनाथ यादव के समर्थन में आवाज उठाई है। संगठन के पदाधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले चुके हैं। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का समर्थन भी पीड़ित पक्ष को मिल रहा है।

संगठन की मांग है कि जमीन विवाद के साथ-साथ बच्चों से काम कराने के आरोपों की भी अलग से निष्पक्ष जांच कराई जाए। किसी भी बच्चे के अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

प्रशासन से पांच बड़ी मांगें

  • विवादित स्थल पर श्रम विभाग एवं बाल संरक्षण इकाई की टीम भेजकर जांच कराई जाए।
  • बच्चों की उम्र, कार्य की प्रकृति और काम कराने वाले व्यक्तियों की पहचान की जाए।
  • सरकारी शिक्षक पर लगाए गए आरोपों की शिक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • खसरा नंबर 15/1 सहित संबंधित भूमि का राजस्व विभाग से सीमांकन कराया जाए।
  • नेशनल हाईवे की जमीन के अधिग्रहण एवं मुआवजा भुगतान के रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं।

🔴 अब सबसे बड़ा सवाल: बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी किसकी?

बस्तर के आदिवासी अंचल में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि नाबालिग बच्चों से अनुचित परिस्थितियों में काम कराया जा रहा है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं जमीन विवाद में भी दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाना चाहिए।

क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले की संयुक्त जांच कराएगा? क्या शिक्षा विभाग सरकारी शिक्षक की भूमिका स्पष्ट करेगा? और क्या पीड़ित देवनाथ यादव को न्याय मिलेगा?

अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।


THE EAGLE EYE NEWS BASTAR

रिपोर्ट: ओम साहू

सच की नजर तीखी और निडर।

महत्वपूर्ण सूचना: इस समाचार में बच्चों से काम कराने, सरकारी शिक्षक की भूमिका और जमीन कब्जे से संबंधित बातें शिकायतकर्ता एवं पीड़ित पक्ष के आरोपों पर आधारित हैं। वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्तियों की उम्र और भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। बच्चों की पहचान गोपनीय रखी गई है।


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