अडावाल में यादव की जमीन पर कब्जे का आरोप! NH की जमीन का मुआवजा लेने के बाद अब देवनाथ यादव की जमीन पर नजर?

पीड़ित के साथ ओबीसी महासभा संभागीय अध्यक्ष श्री दिनेश यदु रामेश्वर बिसाई और मीडिया प्रभारी ओम साहू और समस्त पंचायत प्रतिनिधि

पंचायत प्रतिनिधियों को पुलिस के नाम पर धमकी देने का आरोप, OBC महासभा ने संभाली कमान, दिनेश यदु और टीम मैदान में

जगदलपुर | द ईगल आई न्यूज बस्तर

अडावाल। बस्तर जिले में जमीन से जुड़े विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। जगदलपुर के अडावाल में नेशनल हाईवे से लगी करीब 3 एकड़ जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पीड़ित देवनाथ यादव का आरोप है कि उनकी जमीन पर कब्जा करने और उन्हें परेशान करने की कोशिश की जा रही है। मामला अब तूल पकड़ चुका है। पीड़ित के समर्थन में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के उतरने के बाद ओबीसी महासभा ने भी मोर्चा संभाल लिया है।

🔴 खसरा नंबर 15/1 के सामने NH की जमीन पर पहले कब्जे और मुआवजे का आरोप

मौके पर पंचनामा पटवारी और NH के अधिकारी मौजूद

इस मामले में सबसे गंभीर सवाल खसरा नंबर 15/1 के सामने स्थित नेशनल हाईवे की जमीन को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि संबंधित लोगों द्वारा पूर्व में नेशनल हाईवे की जमीन पर कब्जा किया गया और उसके बदले मुआवजा भी प्राप्त किया गया। अब सवाल यह है कि मुआवजा किस भूमि के लिए और किन दस्तावेजों के आधार पर दिया गया? क्या विभागीय रिकॉर्ड में इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध है?

इन तथ्यों की पुष्टि के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग से मुआवजा भुगतान का रिकॉर्ड, भूमि अधिग्रहण संबंधी दस्तावेज और राजस्व नक्शे की जांच जरूरी है।

🔴 देवनाथ यादव की जमीन का रास्ता बंद करने की कोशिश?

पीड़ित यादव जी

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि अब पीछे स्थित उनकी जमीन तक पहुंचने का रास्ता बंद करने की कोशिश की जा रही है। आरोप यह भी है कि रास्ते को लेकर विवाद खड़ा कर देवनाथ यादव पर दबाव बनाया जा रहा है, ताकि वे अपनी जमीन कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो जाएं।

यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल जमीन विवाद नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति के अधिकार से वंचित करने की गंभीर कोशिश का विषय बन सकता है।

🔴 पंचायत प्रतिनिधियों को भी पुलिस के नाम पर धमकी देने का आरोप

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत के कुछ प्रतिनिधियों को फोन कर पुलिस का नाम लेकर कथित तौर पर धमकाया जा रहा है। उन्हें संबंधित जमीन के मामले में हस्तक्षेप नहीं करने की चेतावनी दिए जाने का आरोप है।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि जमीन पर किसी का वैध अधिकार है तो उसे सरकारी दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया से साबित किया जाना चाहिए। पंचायत प्रतिनिधियों को डराने या दबाव बनाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

✊ OBC महासभा ने संभाली कमान, दिनेश यदु सहित पदाधिकारी मैदान में

पीड़ित देवनाथ यादव की परेशानी की जानकारी मिलने के बाद ओबीसी महासभा के संभागीय अध्यक्ष श्री दिनेश यदु, रामेश्वर बिसाई एवं मीडिया प्रभारी ओम साहू ने मामले में हस्तक्षेप किया है। पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित से मुलाकात की और जमीन विवाद की जानकारी ली।

ओबीसी महासभा के पदाधिकारियों ने पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच, जमीन का सीमांकन और कथित अवैध कब्जे की जांच कराने की मांग की है।

🔴 पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण भी आए समर्थन में

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब गांव के कई लोग और पंचायत प्रतिनिधि भी पीड़ित के समर्थन में सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की जमीन पर जबरन कब्जा नहीं होना चाहिए। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए।

प्रशासन के सामने ये पांच बड़े सवाल

  • खसरा नंबर 15/1 के सामने नेशनल हाईवे की जमीन का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है?
  • क्या संबंधित लोगों को पूर्व में मुआवजा दिया गया है? यदि हां, तो किस भूमि के लिए?
  • देवनाथ यादव की जमीन तक पहुंचने वाले रास्ते की वास्तविक स्थिति क्या है?
  • पंचायत प्रतिनिधियों को कथित धमकी देने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
  • क्या राजस्व विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग संयुक्त सीमांकन कराएंगे?

अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा!

अडावाल का यह मामला अब ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए ओबीसी महासभा ने आवाज बुलंद की है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग कब इस मामले में संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करते हैं।

जमीन किसकी है, रास्ते पर अधिकार किसका है और मुआवजे की वास्तविक कहानी क्या है? इन सभी सवालों का जवाब सरकारी दस्तावेज और निष्पक्ष सीमांकन ही देंगे।


THE EAGLE EYE NEWS BASTAR

रिपोर्ट: ओम साहू

सच की नजर तीखी और निडर।

नोट: इस समाचार में वर्णित कब्जे, मुआवजे और धमकी से संबंधित बातें पीड़ित पक्ष एवं ग्रामीणों के आरोपों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।


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