बस्तर के युवाओं को सभी सरकारी विभागों में मिले स्थानीय रोजगार, शिक्षक भर्ती-2026 में हल्बी, गोंडी और भतरी भाषा को प्राथमिकता देने की मांग

हेमंत कश्यप बोले – बस्तर फाइटर्स तक सीमित न रहे स्थानीय भर्ती, चुनावी वादों के अनुरूप बने स्पष्ट भर्ती नीति

जगदलपुर। बस्तर के युवाओं को सरकारी नौकरियों में स्थानीय स्तर पर प्राथमिकता देने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। युवा कांग्रेस के आदिवासी नेता हेमंत कश्यप ने बस्तर फाइटर्स भर्ती में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि स्थानीय भर्ती की व्यवस्था केवल एक विभाग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि सभी शासकीय विभागों में बस्तर के युवाओं को रोजगार के अवसर देने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।

हेमंत कश्यप ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने बस्तर के युवाओं को सभी शासकीय विभागों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का वादा किया था। लेकिन सरकार बनने के ढाई वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, कृषि, लोक निर्माण और नगर प्रशासन सहित विभिन्न विभागों में स्थानीय युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पाए हैं।

उन्होंने कहा कि केवल बस्तर फाइटर्स भर्ती का उदाहरण देकर सरकार अपने चुनावी वादों की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। बस्तर के हजारों शिक्षित और योग्य युवा लंबे समय से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब उन्हें घोषणाओं के बजाय ठोस निर्णयों की आवश्यकता है।

वन मंत्री से मुख्यमंत्री के समक्ष स्थानीय भर्ती नीति का मुद्दा उठाने की मांग

हेमंत कश्यप ने वन मंत्री केदार कश्यप पर चुनावी वादों को लेकर उदासीनता बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में बस्तर के युवाओं के हितों को लेकर गंभीर है तो वन मंत्री को मुख्यमंत्री से चर्चा कर पूरे बस्तर संभाग के लिए प्रभावी स्थानीय भर्ती नीति लागू करवाने की पहल करनी चाहिए।

शिक्षक भर्ती-2026 में स्थानीय भाषाओं को मिले प्राथमिकता

शिक्षक भर्ती-2026 को बस्तर के युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए हेमंत कश्यप ने मांग की कि भर्ती प्रक्रिया में क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषाई विशेषताओं को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि हल्बी, गोंडी एवं भतरी भाषा का ज्ञान रखने वाले स्थानीय अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषाओं का ज्ञान रखने वाले शिक्षक जनजातीय अंचलों के बच्चों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर सकेंगे। इससे बच्चों को शिक्षा समझने में आसानी होगी, विद्यालयों में उनकी उपस्थिति बढ़ाने में मदद मिलेगी और बस्तर की समृद्ध जनजातीय भाषाओं एवं संस्कृति के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

स्थानीय युवाओं की नियुक्ति से रुकेगा पलायन

हेमंत कश्यप ने कहा कि बस्तर के स्थानीय युवा यहां की भौगोलिक परिस्थितियों, जनजातीय जीवनश


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