बस्तर दशहरा मेले में सुरक्षा और वसूली पर उठे सवाल, झूले व दुकानों की दरें कम करने की मांग

विक्रम लहरे ने प्रशासन से पूछा- मेले में दुर्घटना हुई तो जिम्मेदारी किसकी होगी? गेट पास से लेकर दुकानों तक की दरें सार्वजनिक करने की मांग

जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा मेले में सुरक्षा व्यवस्था, राजस्व वसूली में पारदर्शिता और आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सर्व अनुसूचित जाति समाज के जिलाध्यक्ष विक्रम लहरे ने जिला प्रशासन एवं मेला आयोजकों के समक्ष कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही गेट पास, झूलों और दुकानों की दरें कम करने की मांग की है, ताकि गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवार भी बिना आर्थिक बोझ के मेले का आनंद उठा सकें।

विक्रम लहरे ने कहा कि बस्तर दशहरा मेला केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यहां प्रतिदिन हजारों लोग अपने परिवार और बच्चों के साथ पहुंचते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि मेले में सुरक्षा, स्वच्छता, बिजली व्यवस्था और आपातकालीन सुविधाओं का पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किया जाए।

गेट पास और टैक्स वसूली का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

उन्होंने सवाल उठाया कि मेले में प्रवेश के लिए जारी किए जाने वाले गेट पास की दर क्या निर्धारित है और इससे कितनी आय हो रही है? इसी तरह झूलों, खाने-पीने की दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से कितना शुल्क अथवा टैक्स वसूला जा रहा है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

उन्होंने संबंधित ठेकेदारों एवं दुकानदारों द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन किए जाने की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की। उनका कहना है कि मेले में होने वाली प्रत्येक प्रकार की वसूली की व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि आम जनता के मन में किसी प्रकार का संशय न रहे।

झूलों और बिजली व्यवस्था की तकनीकी जांच हो

विक्रम लहरे ने मेले में लगाए गए झूलों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सभी झूलों की तकनीकी जांच किसी सक्षम विशेषज्ञ से कराई जानी चाहिए। बिजली के तारों को सुरक्षित तरीके से व्यवस्थित किया जाए तथा खुले तारों, खराब विद्युत उपकरणों और अन्य संभावित खतरों को तत्काल दुरुस्त किया जाए।

उन्होंने मेले में अग्निशमन वाहन, प्राथमिक उपचार केंद्र और आपातकालीन सहायता की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल राहत उपलब्ध कराई जा सके।

दुर्घटना होने पर जवाबदेही किसकी होगी?

विक्रम लहरे ने प्रशासन से सीधा सवाल किया कि यदि मेले में किसी झूले के टूटने, बिजली के खुले तारों या सुरक्षा संबंधी लापरवाही के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? पीड़ित व्यक्ति अथवा उसके परिवार को मुआवजा देने की जिम्मेदारी किस अधिकारी, ठेकेदार या संबंधित संस्था की होगी?

उन्होंने कहा कि दुर्घटना होने के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय प्रशासन को पहले से ही स्पष्ट सुरक्षा नियम, जवाबदेही और मुआवजे की व्यवस्था निर्धारित करनी चाहिए, ताकि किसी पीड़ित परिवार को न्याय के लिए भटकना न पड़े।

गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए कम हों दरें

विक्रम लहरे ने दशहरा मेले में गेट पास, विभिन्न प्रकार के झूलों, खाने-पीने की सामग्री और अन्य दुकानों पर मिलने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं की दरें कम करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि दशहरा मेला समाज के प्रत्येक वर्ग का आयोजन है। गरीब, मजदूर, किसान और मध्यमवर्गीय परिवार भी अपने बच्चों के साथ मेले में खुशियां मनाने आते हैं। लेकिन यदि प्रवेश शुल्क, झूलों और खाने-पीने की वस्तुओं के दाम अधिक होंगे, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपने बच्चों को पर्याप्त मनोरंजन नहीं करा पाएंगे।

उन्होंने मांग की कि सभी दुकानों और झूलों के लिए उचित एवं किफायती दरें निर्धारित की जाएं। दुकानदारों को निर्धारित मूल्य सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि मनमानी वसूली पर रोक लग सके।

प्रशासन नियमित निरीक्षण कर सुनिश्चित करे व्यवस्था

विक्रम लहरे ने जिला प्रशासन, नगर निगम और संबंधित विभागों से मेले की व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करने तथा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि मेले का उद्देश्य केवल व्यापार और मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को मनोरंजन और खुशियां प्रदान करना भी है। प्रशासन को राजस्व वसूली के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा, सुविधा और आर्थिक स्थिति को भी समान प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि सुरक्षा व्यवस्था, गेट पास एवं टैक्स वसूली की पारदर्शिता, दुर्घटना की जवाबदेही और झूले व दुकानों की दरों में कमी से जुड़े सभी विषयों पर गंभीरता से संज्ञान लेकर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।

विक्रम लहरे
जिलाध्यक्ष, सर्व अनुसूचित जाति समाज


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