THE EAGLE EYE NEWS | INVESTIGATIVE REPORTबस्तर की जमीन से जुड़ा बड़ा मामला

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बस्तर विश्वविद्यालय के लिए आरक्षित 2 एकड़ जमीन पर भू-माफियाओं की नजर? राजस्व जांच प्रतिवेदन में फर्जी खसरा और करोड़ों के सौदों का जिक्र

जगदलपुर। बस्तर जिले के जगदलपुर स्थित ग्राम धरमपुरा की लगभग 2 एकड़ जमीन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बस्तर विश्वविद्यालय के लिए आरक्षित बताई जा रही इस भूमि के संबंध में राजस्व विभाग के जांच प्रतिवेदन में कथित अवैध कब्जे, फर्जी नक्शा-खसरा तैयार करने और करोड़ों रुपये के जमीन सौदों का उल्लेख किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब कलेक्टर बस्तर से उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।

राजस्व निरीक्षक के जांच प्रतिवेदन में क्या है उल्लेख?

कार्यालय राजस्व निरीक्षक, जगदलपुर द्वारा 24 मार्च 2025 को तैयार जांच प्रतिवेदन में ग्राम धरमपुरा, पटवारी हल्का नंबर 07, तहसील जगदलपुर की भूमि के संबंध में राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किए जाने का उल्लेख है। प्रतिवेदन के अनुसार संबंधित भूमि नगर निगम की लगभग 2 एकड़ शासकीय जमीन है, जिसे बस्तर विश्वविद्यालय के लिए आरक्षित बताया गया है।

जांच प्रतिवेदन में अनंतराम यादव एवं खीरसिंह यादव द्वारा पूर्व में भूमि पर कब्जा किए जाने तथा बाद में कथित रूप से भू-माफियाओं और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी नक्शा एवं खसरा तैयार कर भूमि के निजी व्यक्तियों के नाम पर विक्रय किए जाने के आरोपों का उल्लेख किया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

एक करोड़ और 25 लाख रुपये के सौदों का उल्लेख

राजस्व निरीक्षक के प्रतिवेदन में खसरा नंबर 1/59 एवं 1/13 से संबंधित भूमि के सौदों का उल्लेख किया गया है। इसमें धमतरी निवासी सचिन गुप्ता एवं शाना सोनी के नाम भूमि दर्ज होने तथा लगभग एक करोड़ रुपये और मकान निर्माण के लिए 10 डिसमिल जमीन के एवज में सौदा किए जाने का आरोप सामने आया है।

इसी प्रकार खसरा नंबर 1/1/क/2 एवं 3 को झाडूराम के पास लगभग 25 लाख रुपये में बेचे जाने का भी प्रतिवेदन में उल्लेख है। इन सौदों की वास्तविकता, पंजीयन दस्तावेजों और भुगतान संबंधी तथ्यों की जांच किया जाना आवश्यक है।

1959 के राजस्व रिकॉर्ड में किसका नाम?

जांच प्रतिवेदन में अधिकार अभिलेख पंजी के हस्तलिखित पृष्ठ क्रमांक 58 एवं टंकित पृष्ठ क्रमांक 47, सरल क्रमांक 134 का हवाला दिया गया है। इसमें खसरा नंबर 1/1, रकबा 3.80 एकड़, श्रीमती ललिता बाई पति सुनील सेंट जॉन के नाम दर्ज होने का उल्लेख है।

इसके अलावा राजस्व प्रकरण क्रमांक 78/अ-15/58-59 में 30 जुलाई 1959 को पारित आदेश तथा राजस्व प्रकरण क्रमांक 665/4-121/2019-20 के माध्यम से अभिलेख दुरुस्ती का उल्लेख भी प्रतिवेदन में किया गया है। ऐसे में यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है कि मूल भूमि की स्थिति क्या थी और बाद में अलग-अलग खसरों में भूमि का विभाजन एवं नामांतरण किन दस्तावेजों के आधार पर हुआ।

कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

इस मामले को लेकर ओम साहू द्वारा कलेक्टर बस्तर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। शिकायत में वर्ष 1959 से वर्तमान तक के संपूर्ण राजस्व अभिलेखों, मूल नक्शा, खसरा, बी-1, नामांतरण पंजी, विक्रय विलेख एवं तहसील न्यायालय के आदेशों की जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायत में यह भी मांग की गई है कि संबंधित भूमि के सभी विक्रय एवं नामांतरण दस्तावेजों का परीक्षण कराया जाए तथा यदि फर्जी दस्तावेज, अवैध कब्जा या राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत प्रमाणित होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई की जाए। जांच पूरी होने तक विवादित भूमि के संबंध में नियमानुसार आगे के हस्तांतरण एवं नामांतरण पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

अब प्रशासन के सामने ये बड़े सवाल

  • क्या वास्तव में संबंधित जमीन बस्तर विश्वविद्यालय के लिए आरक्षित शासकीय भूमि है?
  • यदि जमीन शासकीय है तो निजी व्यक्तियों के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड कैसे तैयार हुए?
  • खसरा नंबर 1/59 एवं 1/13 के नामांतरण का आधार क्या था?
  • क्या जमीन की खरीदी-बिक्री के दौरान नियमों का पालन किया गया?
  • क्या इस पूरे मामले में किसी राजस्व अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका रही है?

जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई

धरमपुरा की इस भूमि का मामला सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और राजस्व प्रशासन की पारदर्शिता से जुड़ा है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता से जांच कराता है और शासकीय भूमि की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।

रिपोर्ट: ओम साहू
THE EAGLE EYE NEWS | BASTAR
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