नक्सलवाद के घावों पर मरहम लगाना हमारी जिम्मेदारी : अमित शाह

जगदलपुर, 15 अक्टूबर 2026। नक्सलवाद से मुक्त बस्तर में अब विकास और पुनर्वास की नई इबारत लिखने की तैयारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया है कि बस्तर संभाग के 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा।

रिपोर्ट: ओम साहू | The Eagle Eye News Bastar

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दंतेवाड़ा में आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हंसता-खेलता, खुशहाल और समृद्ध बनाना सरकार का संकल्प है।

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति का पुनर्वास और उसे सम्मानपूर्ण जीवन देना भी जरूरी है। इस दिशा में केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

200 से अधिक सुरक्षा कैंप बनेंगे शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा

अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों पर अब सुरक्षा के साथ-साथ जनसेवा, विकास और आजीविका से जुड़ी गतिविधियां संचालित होंगी।

इन सेवा डेरों में स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा प्रारंभ किया जा चुका है। यहां सिलाई-कढ़ाई, इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियां शुरू की गई हैं।

दंतेवाड़ा में 768 दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण

15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर में बस्तर संभाग के तीन जिलों के 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 लाभार्थी शामिल हैं।

शिविर में व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, कृत्रिम पैर और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर एवं सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।

जगदलपुर शिविर में 3600 से अधिक दिव्यांगजन हुए थे लाभान्वित

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें बस्तर के 1570 से अधिक लाभार्थी शामिल थे। उन्होंने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने अंग गंवाए हैं। ऐसे लोगों को दोबारा आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

8526 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, पुनर्वास के लिए उठाए गए कदम

अमित शाह ने पुनर्वास से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए बताया कि लगभग 8526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 7328 लोगों के बैंक खाते खोले गए, 1620 को इनामी राशि और 7882 को प्रोत्साहन राशि दी गई। 455 लोगों को नौकरी तथा 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं और 2308 लोगों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है। क्षेत्र में 372 नई सड़क परियोजनाएं प्रारंभ की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है।

नक्सलमुक्त बस्तर को देश का सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाएंगे : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सलवाद की चुनौती से मुक्ति मिली है। इस उपलब्धि में सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, बलिदान और बस्तर की जनता के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। हमारा संकल्प है कि बस्तर देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बने।

500 से अधिक गांवों तक पहुंच रही विकास की सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल और संचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं। इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि बस्तर में कृषि, पशुपालन और सिंचाई को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं से करीब 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

विजय शर्मा बोले- प्रभावित परिवारों का पुनर्वास अभियान जारी रहेगा

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों ने बस्तर के अनेक निर्दोष ग्रामीणों का जीवन प्रभावित किया है। किसी ने अपना हाथ खोया तो किसी ने पैर और किसी की आंखों की रोशनी चली गई। राज्य सरकार का प्रयास है कि कोई भी प्रभावित व्यक्ति पुनर्वास और आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।

कृत्रिम पैर मिलने से फिर चलने लगे नक्सल हिंसा के पीड़ित

कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे दोबारा चलने लगे हैं।

बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने से उन्हें फिर से चलने का अवसर मिला है। वहीं दिव्यांगजन अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर खुशी जताई।

बस्तर में शांति के बाद अब समृद्धि की नई शुरुआत

कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास जताया कि नक्सलवाद से मुक्त बस्तर अब विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा। सुरक्षा शिविरों को सेवा केंद्रों में बदलने की पहल को बस्तर के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


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