
15 साल से अधिक पुरानी कारों और मोटरसाइकिलों की तकनीकी जाँच, बीमा, फिटनेस और चालकों के लाइसेंस की जाँच की मांग
जगदलपुर। बस्तर दशहरा मेला के मीना बाजार में संचालित मौत का कुआँ अब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। यहां तेज रफ्तार से गोलाकार दीवारों पर दौड़ने वाली कारों और मोटरसाइकिलों की सुरक्षा, वैध दस्तावेजों तथा तकनीकी स्थिति की जांच को लेकर सर्व अनुसूचित जाति समाज के जिलाध्यक्ष विक्रम लहरे ने जिला प्रशासन, यातायात विभाग और परिवहन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
विक्रम लहरे ने सवाल उठाया कि आम नागरिकों के हेलमेट, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और तेज आवाज वाले साइलेंसर की जांच के नाम पर यातायात विभाग सख्ती से चालानी कार्रवाई करता है, लेकिन मौत के कुएं जैसे जोखिमपूर्ण व्यावसायिक मनोरंजन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की जांच कितनी गंभीरता से की जा रही है?
उन्होंने कहा कि मौत के कुएं में चालक बेहद तेज गति से वाहनों को गोलाकार दीवारों पर दौड़ाते हैं। ऐसी स्थिति में ब्रेक फेल होना, टायर फटना या तकनीकी खराबी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। दुर्घटना होने के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय प्रशासन को पहले ही सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत हो वाहनों की जांच
विक्रम लहरे ने मोटर वाहन अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों का हवाला देते हुए निम्नलिखित जांच की मांग की है—
- धारा 39 एवं 192: मौत के कुएं में इस्तेमाल होने वाले सभी वाहनों के पंजीयन प्रमाणपत्र (RC) की जांच हो।
- धारा 146 एवं 196: सभी वाहनों के अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा की वैधता सुनिश्चित की जाए।
- धारा 190(2): निर्धारित ध्वनि मानकों का उल्लंघन करने वाले साइलेंसर पर कार्रवाई हो।
- धारा 52: इंजन, साइलेंसर एवं अन्य तकनीकी बदलावों की वैधता जांची जाए।
- धारा 56: जहां लागू हो, वहां फिटनेस प्रमाणपत्र की जांच की जाए और वाहनों की तकनीकी सुरक्षा का निरीक्षण हो।
उन्होंने विशेष रूप से 15 वर्ष से अधिक पुरानी गाड़ियों की जांच की मांग की। ऐसी गाड़ियों के पंजीयन नवीनीकरण, तकनीकी स्थिति और लागू परिवहन नियमों की समीक्षा हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल वाहन का पुराना होना उसे स्वतः अवैध नहीं बनाता, लेकिन असुरक्षित या नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों का संचालन नहीं होना चाहिए।
हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
विक्रम लहरे ने प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल रखे हैं।
- मौत के कुएं में किसी चालक की मृत्यु या गंभीर दुर्घटना होने पर जिम्मेदार कौन होगा?
- मौत के कुएं के संचालक और ठेकेदार की जवाबदेही क्या होगी?
- मेला आयोजक की कानूनी जिम्मेदारी किस सीमा तक तय होगी?
- दुर्घटना की स्थिति में चालकों और कलाकारों के उपचार, बीमा तथा मुआवजे की व्यवस्था क्या है?
- सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करने वाले संबंधित विभागों की जिम्मेदारी क्या है?
- आवश्यक दस्तावेजों और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बिना संचालन की अनुमति कैसे दी गई?
उन्होंने कहा कि इन सभी सवालों पर जिला प्रशासन को स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में कानूनी जिम्मेदारी तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर निर्धारित होनी चाहिए।
जिला प्रशासन से आठ सूत्रीय मांग
विक्रम लहरे ने जिला प्रशासन, यातायात विभाग एवं परिवहन विभाग से मांग की है कि—
- मौत के कुएं में इस्तेमाल होने वाली सभी कारों एवं मोटरसाइकिलों की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए।
- 15 वर्ष से अधिक पुरानी गाड़ियों के पंजीयन, नवीनीकरण एवं सुरक्षा की विशेष जांच हो।
- बिना वैध RC, आवश्यक बीमा और अनिवार्य दस्तावेजों वाले वाहनों पर कार्रवाई हो।
- चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों के साइलेंसर की जांच की जाए।
- संचालक की अनुमति, बैरिकेडिंग, आपातकालीन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों का निरीक्षण हो।
- चालकों एवं कलाकारों के दुर्घटना बीमा, उपचार और मुआवजे की व्यवस्था स्पष्ट की जाए।
- यातायात एवं परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा कर प्रमाणित लापरवाही पर कार्रवाई हो।
- जांच और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
पहले सुरक्षा, फिर मनोरंजन
विक्रम लहरे ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक मेला नहीं, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है। यहां हजारों लोग अपने परिवार और बच्चों के साथ पहुंचते हैं। ऐसे में दर्शकों की सुरक्षा के साथ-साथ मौत के कुएं में अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले कलाकारों की जिंदगी की रक्षा करना भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आम जनता के लिए कानून और यातायात नियमों का पालन अनिवार्य है, तो व्यावसायिक मनोरंजन के आयोजनों में भी समान रूप से नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उनकी स्पष्ट मांग है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किए बिना मौत के कुएं की तत्काल जांच कराई जाए और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जारीकर्ता:
विक्रम लहरे
जिलाध्यक्ष, सर्व अनुसूचित जाति समाज, बस्तर
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