
बस्तर महाराज की बताई जा रही राजबाड़ा की जमीन पर Fantasy Park Fun Fair का आयोजन। आठ काउंटरों की टिकट बिक्री, झूलों के ₹50 से ₹150 तक रेट और बच्चों की उम्र को लेकर दोहरी शर्त। आखिर इस पूरे कारोबार की निगरानी कौन कर रहा है?
📍 जगदलपुर | बस्तर, छत्तीसगढ़
रिपोर्ट: ओम साहू | द ईगल आई न्यूज
बस्तर दशहरा केवल एक मेला नहीं, बल्कि लगभग छह शताब्दियों पुरानी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। लेकिन इसी ऐतिहासिक पर्व के दौरान जगदलपुर में संचालित मीना बाजार इन दिनों मनोरंजन से ज्यादा टिकट व्यवस्था, प्रवेश शुल्क, झूलों की कीमतों, टैक्स और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवालों के घेरे में है।
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मीना बाजार का आयोजन राजबाड़ा की जमीन पर हो रहा है, जिसे बस्तर महाराज की जमीन बताया जा रहा है। ऐसे में जमीन के स्वामित्व, आयोजन की अनुमति, आयोजक के साथ हुए समझौते, किराये और व्यावसायिक गतिविधियों की शर्तों को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
द ईगल आई न्यूज के पास मौजूद तस्वीरें मीना बाजार की टिकट व्यवस्था पर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती हैं। एक तरफ प्रवेश द्वार पर बच्चों को पांच वर्ष तक मुफ्त प्रवेश देने की जानकारी है, वहीं दूसरी तरफ टिकट पर तीन वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों से पूरा शुल्क लेने की शर्त लिखी है।
🚨 एक मेला, दो नियम!

बोर्ड: 5 वर्ष तक बच्चों का टिकट मुफ्त
टिकट: 3 वर्ष से अधिक बच्चों से पूरा शुल्क
आखिर सही नियम कौन-सा है?
1. राजबाड़ा की जमीन पर कारोबार: समझौते की शर्तें क्या हैं?
मीना बाजार का आयोजन राजबाड़ा की जमीन पर किया जा रहा है, जिसे बस्तर महाराज की जमीन बताया जा रहा है। ऐसे में जमीन के स्वामित्व और आयोजक को जमीन उपलब्ध कराने की शर्तों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
- जमीन का वर्तमान कानूनी स्वामित्व किसके नाम दर्ज है?
- क्या आयोजक और जमीन मालिक के बीच लिखित अनुबंध हुआ है?
- जमीन का किराया कितना निर्धारित किया गया?
2. पांच साल मुफ्त या तीन साल से पूरा पैसा? टिकट में दोहरी शर्त!
मीना बाजार के प्रवेश द्वार पर लगे बोर्ड में स्पष्ट लिखा है कि पांच वर्ष तक के बच्चों का टिकट नहीं लगेगा। लेकिन Fantasy Park Fun Fair की प्रवेश टिकट पर अंग्रेजी में लिखा है:
“CHILDREN ABOVE 3 YEARS CHARGED FULL”
इसका अर्थ है कि तीन वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों से पूरा प्रवेश शुल्क लिया जाएगा।
अब सवाल यह है कि तीन से पांच वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त प्रवेश मिलेगा या उनसे भी ₹30 वसूले जाएंगे?
- क्या टिकट की शर्त प्रशासन द्वारा स्वीकृत है?
- क्या बोर्ड और टिकट की शर्तें एक-दूसरे के अनुरूप हैं?
- क्या आयोजक ने दोनों व्यवस्थाओं की जानकारी प्रशासन को दी है?
- यदि किसी परिवार से अतिरिक्त शुल्क लिया गया तो जवाबदेही किसकी होगी?
यह केवल प्रिंटिंग की गलती का मामला नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को दी जा रही जानकारी की विश्वसनीयता का सवाल है।
3. ₹30 प्रवेश शुल्क: अनुमति किसकी और दर निर्धारण किस आधार पर?
प्रवेश द्वार पर ₹30 प्रति टिकट का बोर्ड लगाया गया है। पांच सदस्यों वाले परिवार को केवल प्रवेश के लिए ₹150 खर्च करने पड़ सकते हैं। इसके बाद झूले, खाने-पीने और अन्य मनोरंजन गतिविधियों का अलग खर्च है।
प्रशासन से सवाल:
- ₹30 प्रवेश शुल्क किसने निर्धारित किया?
- क्या जमीन मालिक और आयोजक के समझौते में इसका उल्लेख है?
- क्या प्रवेश शुल्क की दर प्रशासन को बताई गई?
- क्या आम जनता के हित में दरों की समीक्षा हुई?
- क्या टिकट की कीमत में लागू कर शामिल है?
4. आठ काउंटरों की टिकट बिक्री: एक काउंटर पर 1,942 टिकट!
सामने आए काउंटर संबंधी आंकड़े में एक काउंटर पर 1,942 टिकट कटने की जानकारी है। टिकट की तस्वीरों में क्रमांक 1941 और 1942 भी दिखाई दे रहे हैं।
यदि गणना के लिए मान लिया जाए कि सभी आठ काउंटरों पर समान संख्या में टिकट जारी हुए हैं, तो संभावित गणना इस प्रकार होगी: विवरण आंकड़ा कुल काउंटर 8 प्रति काउंटर टिकट 1,942 अनुमानित कुल टिकट 15,536 प्रति टिकट शुल्क ₹30 संभावित कुल वसूली ₹4,66,080
नोट: यह सभी आठ काउंटरों पर समान टिकट बिक्री मानकर निकाला गया अनुमान है। वास्तविक कुल बिक्री का सत्यापन आवश्यक है।
प्रशासन को सभी आठ काउंटरों की टिकट बुक, शुरुआती और अंतिम क्रमांक, प्रतिदिन जारी टिकट, रद्द टिकट, मुफ्त पास और कुल प्राप्त राशि का मिलान कराना चाहिए।
5. GST और टैक्स: टिकट पर पूरी जानकारी कहां?
टिकट की तस्वीर में आयोजक का पूरा कानूनी नाम, पता और GST संबंधी विवरण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं।
GST कानून के तहत मनोरंजन और एम्यूजमेंट सेवाओं पर सेवा की प्रकृति, वर्गीकरण और लागू अधिसूचना के अनुसार कर देयता निर्धारित होती है। कुछ थीम पार्क और मनोरंजन सुविधाओं की प्रवेश सेवाओं पर 18 प्रतिशत GST लागू हो सकता है।
लेकिन केवल टिकट पर GSTIN दिखाई नहीं देने से टैक्स चोरी साबित नहीं होती। आयोजक की GST पंजीकरण स्थिति, कारोबार और जारी किए गए दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
- क्या आयोजक GST में पंजीकृत है?
- ₹30 प्रवेश शुल्क GST सहित है या अतिरिक्त?
- क्या टिकट बिक्री का पूरा लेखा-जोखा रखा जा रहा है?
- क्या झूला संचालकों और दुकानदारों की कर देयता की जांच हुई?
- क्या वाणिज्यिक कर विभाग ने निरीक्षण किया?
6. झूलों के ₹50 से ₹200 तक रेट: मनमानी पर नियंत्रण किसका?
मीना बाजार में प्रवेश के बाद प्रत्येक झूले के लिए अलग-अलग शुल्क लिया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कई झूलों की दर ₹50 से शुरू होकर ₹200 तक बताई जा रही है।
क्या आयोजक ने सभी झूलों की दरों की सूची प्रशासन को दी है? क्या प्रत्येक झूले के सामने मूल्य सूची प्रदर्शित है? क्या निर्धारित दर से अधिक वसूली पर शिकायत की व्यवस्था है?
प्रशासन को सभी झूलों की घोषित दरों और वास्तविक वसूली का मिलान कराना चाहिए।
7. मौत का कुआं और बड़े झूले: सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
मीना बाजार में मौत का कुआं, बड़े झूले और अस्थायी मनोरंजन संरचनाएं संचालित होती हैं। इनकी तकनीकी खराबी या सुरक्षा में लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
- झूलों की तकनीकी फिटनेस और संरचनात्मक सुरक्षा।
- विद्युत कनेक्शन और अर्थिंग।
- अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकास।
- प्रशिक्षित ऑपरेटर और क्षमता सीमा।
- प्राथमिक उपचार और एंबुलेंस।
- मौत का कुआं और जोखिमपूर्ण गतिविधियों की आवश्यक अनुमति।
क्या प्रत्येक झूले का निरीक्षण हुआ है? क्या प्रशासन के पास सुरक्षा निरीक्षण की लिखित रिपोर्ट उपलब्ध है?
8. खाद्य दुकानों पर FSSAI और मनमानी कीमतों की जांच
मीना बाजार में खाने-पीने की अनेक दुकानें संचालित होती हैं। खाद्य सुरक्षा कानून के अनुसार पात्र कारोबारियों के लिए FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस आवश्यक है।
खाद्य सुरक्षा विभाग को खाद्य गुणवत्ता, एक्सपायरी सामग्री, स्वच्छ पेयजल, मूल्य सूची, दुकानों के पंजीकरण और साफ-सफाई की जांच करनी चाहिए।
9. VIP पास वालों को छूट, आम जनता से वसूली?
मीना बाजार में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली लोगों को विशेष पास मिलने की चर्चा भी सवाल खड़े करती है।
- कितने VIP पास जारी किए गए?
- किस आधार पर मुफ्त प्रवेश दिया गया?
- क्या पास वितरण का रिकॉर्ड उपलब्ध है?
- क्या आम नागरिकों के लिए भी कोई रियायत है?
यदि आयोजक विशेष पास जारी करता है तो उसकी संख्या और वितरण का रिकॉर्ड होना चाहिए। जनप्रतिनिधियों को भी जनता के हितों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
10. प्रशासन की जिम्मेदारी: अनुमति देकर पल्ला झाड़ना पर्याप्त नहीं!
विभाग प्रमुख जिम्मेदारी जिला कलेक्टरअनुमति, समन्वय और जनहित नगर निगमस्थानीय अनुमति, स्वच्छता और नागरिक सुविधाएं पुलिस विभागसुरक्षा और कानून व्यवस्था वाणिज्यिक कर विभागGST और कर अनुपालन खाद्य सुरक्षा विभागFSSAI और खाद्य गुणवत्ता अग्निशमन विभागअग्नि सुरक्षा विद्युत विभागविद्युत सुरक्षा संबंधित तकनीकी एजेंसीझूलों की फिटनेस
11. द ईगल आई न्यूज की 15 सूत्रीय जांच की मांग
- मीना बाजार की अनुमति और स्वीकृति आदेश।
- आयोजक का पूरा कानूनी विवरण।
- राजबाड़ा की जमीन का स्वामित्व और आयोजन संबंधी अनुमति।
- जमीन मालिक और आयोजक के बीच समझौते की शर्तें।
- ₹30 प्रवेश शुल्क निर्धारित करने का आधार।
- बोर्ड और टिकट पर बच्चों की उम्र संबंधी विरोधाभास की जांच।
- सभी आठ काउंटरों की टिकट बिक्री का रिकॉर्ड।
- मुफ्त पास और VIP पास का विवरण।
- GST पंजीकरण और लागू कर की जांच।
- झूलों की दर सूची और वसूली का विवरण।
- झूलों की तकनीकी फिटनेस रिपोर्ट।
- अग्निशमन और विद्युत सुरक्षा प्रमाणपत्र।
- खाद्य दुकानों के FSSAI पंजीकरण की जांच।
- पार्किंग और यातायात व्यवस्था की समीक्षा।
- प्रशासन द्वारा किए गए निरीक्षण और कार्रवाई की रिपोर्ट।
बस्तर में अंधेर नगरी, चौपट राजा?
बस्तर दशहरा हमारी सांस्कृतिक विरासत है। राजबाड़ा और राजपरिवार का इस ऐतिहासिक परंपरा से विशेष संबंध है। ऐसे आयोजन में व्यावसायिक गतिविधियां होना गलत नहीं है, लेकिन पारदर्शिता, सुरक्षा और जनता के हितों से समझौता नहीं होना चाहिए।
एक तरफ ₹30 प्रवेश शुल्क, दूसरी तरफ झूलों के ₹50 से ₹200 तक रेट, बच्चों की उम्र को लेकर दो अलग-अलग शर्तें और टिकट बिक्री के आंकड़ों पर सवाल।
बस्तर की जनता को मनोरंजन चाहिए, आर्थिक शोषण नहीं। VIP व्यवस्था नहीं, समान व्यवस्था चाहिए। प्रशासनिक अनुमति नहीं, जवाबदेही भी चाहिए।
क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?
12. बस्तर महाराज, आयोजक और प्रशासन से जवाब अपेक्षित
इस पूरे मामले में जमीन के स्वामित्व और आयोजक के बीच हुए समझौते की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। बस्तर महाराज या राजपरिवार की ओर से जमीन के उपयोग संबंधी जानकारी, आयोजक की ओर से टिकट एवं शुल्क व्यवस्था का स्पष्टीकरण और प्रशासन की ओर से अनुमति एवं निरीक्षण की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
द ईगल आई न्यूज संबंधित सभी पक्षों का जवाब और स्पष्टीकरण प्रकाशित करने के लिए आमंत्रित करता है। प्राप्त पक्ष को समाचार में उचित स्थान दिया जाएगा।
द ईगल आई न्यूज की स्पष्ट मांग
जिला कलेक्टर बस्तर, नगर निगम आयुक्त, वाणिज्यिक कर विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग, पुलिस प्रशासन और संबंधित तकनीकी अधिकारियों से मांग है कि मीना बाजार की अनुमति, जमीन संबंधी अनुबंध, टिकट बिक्री, GST, झूलों की दरों और सुरक्षा व्यवस्था की संयुक्त एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
✍️ विशेष खोजी पड़ताल
THE EAGLE EYE NEWS BASTAR
सच की नजर तीखी और निडर
रिपोर्ट: ओम साहू

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