
पाव-भाजी, मंचूरियन, आलू टिक्की और गुपचुप की दुकानों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल; खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, साफ-सफाई, कीमत और मात्रा की जांच कराने की मांग।
जगदलपुर, बस्तर | रिपोर्ट: ओम साहू
जगदलपुर। बस्तर दशहरा मेला अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। दशहरा उत्सव के दौरान मीना बाजार में हजारों की संख्या में लोग परिवार और बच्चों के साथ पहुंचते हैं। मनोरंजन के साथ खानपान भी मेले का प्रमुख आकर्षण होता है, लेकिन इस बार मीना बाजार में संचालित खाद्य दुकानों की गुणवत्ता, स्वाद, साफ-सफाई और मनमाने दामों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
पाव-भाजी, मंचूरियन, आलू टिक्की, गुपचुप सहित अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वाली दुकानों को लेकर सर्व अनुसूचित जाति समाज के जिलाध्यक्ष विक्रम लहरे ने जिला प्रशासन एवं खाद्य सुरक्षा विभाग से तत्काल जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मेले में आने वाले उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण और स्वच्छ भोजन मिलना चाहिए।
खराब स्वाद और गुणवत्ता पर सवाल, आखिर जांच कौन करेगा?
विक्रम लहरे ने कहा कि खाद्य दुकानों में बेचे जा रहे व्यंजनों की गुणवत्ता और स्वाद संतोषजनक नहीं होने तथा ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। केवल दुकानें लगवाकर शुल्क वसूलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मेले में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता हितों की निगरानी भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिक बाजार में खाद्य सामग्री खरीदता है तो उससे गुणवत्ता और कीमत के अनुरूप सेवा मिलने की अपेक्षा रहती है। ऐसे में मेले में अस्थायी दुकानें संचालित करने वाले कारोबारियों को भी खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन करना अनिवार्य होना चाहिए।
खराब तेल, बासी भोजन और दूषित पानी की हो जांच
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम द्वारा सभी खाद्य दुकानों का निरीक्षण किया जाना चाहिए। विशेष रूप से इस्तेमाल किए जा रहे खाद्य तेल, मसाले, पानी, सब्जियों और अन्य कच्ची सामग्री की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए।
यदि किसी दुकान में बासी भोजन, खराब तेल, मिलावटी मसाले, दूषित पानी अथवा अस्वच्छ तरीके से खाद्य सामग्री तैयार करने की स्थिति मिलती है तो संबंधित संचालक के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मनमाने दाम और कम मात्रा पर भी प्रशासन की नजर जरूरी
खाद्य दुकानों में वस्तुओं की कीमत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए। ग्राहक को खरीदारी से पहले कीमत की जानकारी मिलनी चाहिए। घोषित कीमत से अधिक राशि वसूलने या निर्धारित कीमत के मुकाबले कम मात्रा देने की शिकायतों की भी जांच होनी चाहिए।
मेले में आने वाले गरीब, मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवार भी अपने बच्चों के साथ खानपान पर खर्च करते हैं। ऐसे में खराब गुणवत्ता के खाद्य पदार्थों के लिए अधिक कीमत वसूलना उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है।
जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से सात प्रमुख मांगें
- मीना बाजार की सभी खाद्य दुकानों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए।
- पाव-भाजी, मंचूरियन, आलू टिक्की, गुपचुप सहित अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।
- खराब तेल, मिलावटी मसाले, दूषित पानी और बासी खाद्य सामग्री की जांच हो।
- सभी दुकानों में खाद्य पदार्थों की कीमत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कराई जाए।
- खाद्य पदार्थों की मात्रा, गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच हो।
- सभी दुकानदारों के खाद्य पंजीयन एवं आवश्यक लाइसेंस की वैधता जांची जाए।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर जुर्माना एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाए।
विक्रम लहरे बोले—जनता के स्वास्थ्य और जेब से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
बस्तर दशहरा हमारी संस्कृति और परंपरा का गौरव है। मेले में आने वाली जनता के स्वास्थ्य और उसकी मेहनत की कमाई दोनों की सुरक्षा जरूरी है। जब ग्राहक पैसा खर्च करके भोजन खरीदता है तो उसे अच्छी गुणवत्ता, उचित स्वाद और सही मात्रा मिलनी चाहिए। मनमाने दाम वसूलना और खराब गुणवत्ता का भोजन बेचना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।विक्रम लहरे, जिलाध्यक्ष, सर्व अनुसूचित जाति समाज, बस्तर
बड़ा सवाल: मेले में खाद्य सुरक्षा की नियमित निगरानी कौन कर रहा है?
मीना बाजार में हजारों लोगों की आवाजाही को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि खाद्य दुकानों का निरीक्षण कब किया गया, कितने दुकानदारों के लाइसेंस जांचे गए और खाद्य पदार्थों के कितने नमूने लिए गए।
विक्रम लहरे ने जिला प्रशासन एवं खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की है कि केवल औपचारिक निरीक्षण तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि नियमित जांच अभियान चलाया जाए। शिकायतें सही पाए जाने पर संबंधित दुकानदारों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो और जांच की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
जनता के स्वास्थ्य और मेहनत की कमाई से किसी को खिलवाड़ करने की छूट नहीं मिलनी चाहिए। बस्तर दशहरा मेला में मनोरंजन के साथ सुरक्षित, स्वच्छ और उचित कीमत पर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
प्रस्तुति: THE EAGLE EYE NEWS | BASTAR
सच की नजर तीखी और निडर
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