
जगदलपुर | रिपोर्ट: ओम साहू
बस्तर: सरकारी विभागों में कर्मचारियों के निधन के बाद उनके परिवार को मिलने वाले वैधानिक लाभों के लिए भी यदि महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसा ही एक मामला जगदलपुर में सामने आया है, जहां दिवंगत शासकीय कर्मचारी की पत्नी ने शिक्षा विभाग में सेवा पुस्तिका और ऋण पुस्तिका गुम होने तथा पेंशन संबंधी कार्यवाही लंबित रहने का आरोप लगाया है। न्याय की मांग को लेकर अब उन्होंने कलेक्ट्रेट में शांतिपूर्ण धरना देने की सूचना दी है।
15 अप्रैल 2025 को हुआ था कर्मचारी का निधन
प्राप्त आवेदन के अनुसार, आवेदिका सुप्रिया दास के पति स्वर्गीय श्री रघुराज दास शासकीय हाई स्कूल में सहायक ग्रेड-2 के पद पर पदस्थ थे। उनका निधन 15 अप्रैल 2025 को हुआ था। आवेदिका का आरोप है कि पति के निधन के बाद शिक्षा विभाग के कर्मचारियों द्वारा उन्हें जानकारी दी गई थी कि उनके पति की सेवा पुस्तिका एवं ऋण पुस्तिका गुम हो गई है।
आवेदिका का कहना है कि इस संबंध में कई बार कार्यालयों में शिकायत एवं पत्राचार करने के बावजूद आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि लगभग डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी उन्हें उचित राहत नहीं मिली और पेंशन सहित अन्य लंबित स्वत्वों की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
सुप्रिया दास ने अपने आवेदन में बताया है कि लगातार शिकायत करने के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं किया गया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि पति की मृत्यु के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानियों से गुजर रहा है। पेंशन एवं अन्य लाभों के लिए आवश्यक दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है।
23 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट में धरना देने की सूचना

आवेदिका ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी बस्तर को दिए आवेदन में 23 अक्टूबर 2026 को कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने की अनुमति एवं सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की अपील की है।
इस मामले में नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कल्याण संघ, शिक्षा विभाग, जगदलपुर जिला बस्तर ने भी कलेक्टर को पत्र लिखकर प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन की सूचना दी है। संघ ने सुप्रिया दास की मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन में सहयोग देने की बात कही है।
शिक्षा विभाग और प्रशासन से उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी शासकीय कर्मचारी की सेवा पुस्तिका और ऋण पुस्तिका वास्तव में गुम हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है? दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण दिवंगत कर्मचारी के परिवार को मिलने वाले पेंशन एवं अन्य देय लाभों की प्रक्रिया आखिर क्यों प्रभावित हो रही है?
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और 23 अक्टूबर से पहले पीड़ित परिवार को राहत मिल पाती है या नहीं। एक विधवा महिला को अपने पति के निधन के बाद मिलने वाले अधिकारों के लिए धरना देने की नौबत आना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़ा करता है।
इन सवालों का जवाब देना जरूरी
- दिवंगत कर्मचारी की सेवा पुस्तिका और ऋण पुस्तिका कहां हैं?
- दस्तावेज गुम होने की स्थिति में विभाग ने क्या कार्रवाई की?
- पेंशन एवं अन्य स्वत्वों का भुगतान अब तक क्यों लंबित है?
- पीड़ित परिवार को राहत देने के लिए प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
नोट: समाचार आवेदिका एवं कर्मचारी संघ द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर आधारित है। शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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