
जनता पूछ रही है—आखिर किसके दबाव में कार्रवाई नहीं हो रही? क्या आयोजकों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? विक्रम लहरे ने विधायक, सांसद और प्रशासन से मांगा जवाब।
📍 जगदलपुर, जिला बस्तर | विशेष रिपोर्ट
जगदलपुर। बस्तर दशहरा मेला के मीना बाजार में सुरक्षा व्यवस्था, ‘मौत का कुआँ’, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मनमाने दामों को लेकर मीडिया में लगातार तीन बार खबरें प्रकाशित एवं प्रसारित होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं होने पर सवाल उठने लगे हैं। सर्व अनुसूचित जाति समाज के जिलाध्यक्ष विक्रम लहरे ने इस मामले में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि जब आम जनता के हेलमेट, वाहन बीमा, दस्तावेज और यातायात नियमों को लेकर तत्काल चालानी कार्रवाई की जाती है, तो मीना बाजार में सुरक्षा मानकों की जांच करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं या आयोजकों पर भी समान रूप से लागू होते हैं?
🔥 विधायक और सांसद जवाब दें!
जगदलपुर विधायक और बस्तर सांसद से सीधा सवाल है कि जब जनता की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे बार-बार मीडिया में उठ रहे हैं, तो अब तक उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जवाब क्यों नहीं मांगा?
क्या इस मामले में कोई पहल की गई है? यदि की गई है, तो उसकी जानकारी जनता के सामने सार्वजनिक की जाए।
विक्रम लहरे ने कहा कि जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं आयोजकों को राजनीतिक संरक्षण तो प्राप्त नहीं है? यदि ऐसा नहीं है, तो विधायक, सांसद और प्रशासन सामने आकर जांच तथा कार्रवाई की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। बिना प्रमाण किसी पर आरोप लगाना हमारा उद्देश्य नहीं है, लेकिन जनहित के सवालों से बचा भी नहीं जा सकता।
⚠️ प्रशासन तत्काल कराए इन बिंदुओं पर जांच
1. मौत का कुआँ की सुरक्षा: संचालन में इस्तेमाल होने वाली सभी गाड़ियों के पंजीयन दस्तावेज, फिटनेस, बीमा और सुरक्षा मानकों की जांच हो।
2. असुरक्षित संचालन पर रोक: निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली गाड़ियों और असुरक्षित संचालन पर नियमानुसार रोक लगाई जाए।
3. खाद्य सुरक्षा: पावभाजी, मंचूरियन, आलू टिक्की, गुपचुप सहित सभी खाद्य दुकानों में खाद्य गुणवत्ता, स्वच्छता और FSSAI नियमों की जांच हो।
4. मनमानी वसूली: दुकानों, झूलों और गेट पास की दरों तथा संबंधित शुल्क की जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
5. विद्युत एवं झूला सुरक्षा: बिजली के तारों, झूलों और अन्य मनोरंजन साधनों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।
6. दुर्घटना की जिम्मेदारी: किसी दुर्घटना की स्थिति में आयोजक, संबंधित विभाग और अन्य जिम्मेदार पक्षों की कानूनी जवाबदेही स्पष्ट हो तथा पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा मिले।
तीन बार खबरों के बाद भी कार्रवाई नहीं, तो जवाबदेह कौन?
विक्रम लहरे ने कहा कि जनता की सुरक्षा कोई राजनीतिक एहसान नहीं, बल्कि प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है। यदि लगातार शिकायतों और मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद जांच नहीं होती, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है। किसी बड़े आयोजन के नाम पर सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने जगदलपुर विधायक, बस्तर सांसद और जिला प्रशासन से मांग की कि मीना बाजार में तत्काल व्यापक जांच कराई जाए और अब तक की गई कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जाए। यदि निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो।
अब जनता को आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए!
सवालों का जवाब चाहिए और सबसे बढ़कर अपनी सुरक्षा की गारंटी चाहिए।
📢 प्रेस विज्ञप्ति जारीकर्ता
विक्रम लहरे
जिलाध्यक्ष, सर्व अनुसूचित जाति समाज
जगदलपुर, जिला बस्तर (छत्तीसगढ़)
THE EAGLE EYE NEWS
सच की नजर तीखी और निडर
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