THE EAGLE EYE NEWS | BASTAR

सच की नजर तीखी और निडर

अश्लील फोटो

मीना बाजार में ‘रशियन जलपरी’ का आकर्षण! ₹100 टिकट लेकर क्या देखने पहुंच रहे युवा?

युवाओ नौजवानों को लुटने का तरीका

आकर्षक पोस्टरों और प्रचार के जरिए युवाओं को लुभाने की कोशिश? बस्तर दशहरा मेले में पारिवारिक मनोरंजन की मर्यादा और प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल।

रिपोर्ट: ओम साहू


जगदलपुर। बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित मीना बाजार में इन दिनों एक विशेष आकर्षण चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां ‘रशियन जलपरी’ के नाम से प्रचार किया जा रहा है। परिसर में लगाए गए बड़े-बड़े पोस्टरों में जलपरी के रूप में महिलाओं की आकर्षक तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। वहीं टिकट काउंटर पर इस आकर्षण के लिए ₹100 टिकट का बोर्ड दिखाई दे रहा है।

सवाल यह है कि आखिर ‘रशियन जलपरी’ के नाम पर दर्शकों को क्या दिखाया जा रहा है? क्या वास्तव में कोई रूसी कलाकार इस कार्यक्रम का हिस्सा है या फिर यह केवल दर्शकों को आकर्षित करने के लिए इस्तेमाल किया गया प्रचारात्मक नाम है? आयोजकों को इस संबंध में स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

₹100 का टिकट, लेकिन आकर्षण की वास्तविकता क्या?

मीना बाजार परिसर में लगाए गए टिकट काउंटर पर ₹100 की कीमत प्रदर्शित है। ऐसे में दर्शकों को टिकट खरीदने से पहले यह जानकारी मिलनी चाहिए कि इस टिकट के बदले उन्हें किस प्रकार का कार्यक्रम या प्रदर्शन देखने को मिलेगा। प्रचार में इस्तेमाल किए जा रहे नाम और तस्वीरों की वास्तविकता भी स्पष्ट होनी चाहिए।

बस्तर दशहरा: पारिवारिक मेले की गरिमा का सवाल

बस्तर दशहरा केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ा महापर्व है। मीना बाजार में प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और परिवार पहुंचते हैं। ऐसे में आयोजकों की जिम्मेदारी है कि प्रचार सामग्री और प्रदर्शित कार्यक्रम की प्रकृति के बारे में दर्शकों को स्पष्ट जानकारी दें।

यह सवाल किसी कलाकार की व्यक्तिगत गरिमा या स्वतंत्रता पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक आयोजन में पारदर्शिता, प्रचार की सत्यता और परिवारों के लिए उपयुक्त मनोरंजन व्यवस्था से जुड़ा है।

प्रशासन से पांच सीधे सवाल

  • ‘रशियन जलपरी’ नाम से प्रचारित आकर्षण की वास्तविकता क्या है?
  • क्या प्रचार में इस्तेमाल किए गए नाम और दावों की पुष्टि की गई है?
  • क्या संबंधित कार्यक्रम के लिए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त हैं?
  • क्या कार्यक्रम की प्रकृति और प्रचार सामग्री की जांच संबंधित विभागों ने की है?
  • क्या मेला प्रबंधन ने परिवारों और बच्चों की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए निगरानी की व्यवस्था की है?

जनता जानना चाहती है—मनोरंजन के नाम पर आखिर दिखाया क्या जा रहा है?

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, मेला प्रबंधन और संबंधित विभाग इस आकर्षण की वास्तविकता, अनुमति तथा प्रचार सामग्री की जांच कर स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं। सार्वजनिक आयोजन में मनोरंजन के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है।


THE EAGLE EYE NEWS | BASTAR

रिपोर्ट: ओम साहू


Posted

in

by

Tags:

Comments

Leave a Reply