बकावंड पंचायत में विकास के नाम पर लाखों का भुगतान, बिलों पर उठे गंभीर सवाल!

बिना काम फर्जी आहरण

सड़क मरम्मत से लेकर सोलर पंप तक भुगतान दर्ज, कहीं GST नंबर गायब तो कहीं काम की वास्तविकता संदिग्ध; ग्रामीणों ने उठाई सोशल ऑडिट और उच्चस्तरीय जांच की मांग

बकावंड/जगदलपुर। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के उपयोग और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बस्तर जिले के जनपद पंचायत बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बकावंड में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज भुगतान और सामने आए बिलों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार सड़क मरम्मत, सीसी सड़क निर्माण, सोलर पंप, निर्माण सामग्री, विद्युत सामग्री और अन्य मदों में भुगतान किया गया है। लेकिन इन भुगतानों के विरुद्ध वास्तविक कार्य, सामग्री की आपूर्ति और बिलों की वैधता को लेकर जांच की मांग उठ रही है।

ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज भुगतान

सामने आए पोर्टल स्क्रीनशॉट में वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत निम्न भुगतान दर्ज दिखाई देते हैं:

  • सड़क मरम्मत: ₹49,000 का भुगतान जगमोहन ठाकुर के नाम दर्ज है। वाउचर संख्या XVFC/2026-27/P/11 तथा दिनांक 11 सितंबर 2026 दिखाई दे रही है।
  • सीसी सड़क निर्माण: पटेल पारा से स्कूल से रैशिंग घर तक सीसी सड़क निर्माण के नाम पर ₹93,000 का भुगतान D.B. Traders को दर्ज है। वाउचर संख्या XVFC/2026-27/P/8 तथा दिनांक 8 सितंबर 2026 है।

बिलों में भी कई सवाल, GST विवरण की जांच जरूरी

उपलब्ध दस्तावेजों में अलग-अलग फर्मों के बिल सामने आए हैं। इनमें प्रमुख रूप से:

  • तरुण शर्मा हार्डवेयर: दिनांक 2 अक्टूबर 2026 के बिल में निर्माण सामग्री के नाम पर कुल ₹55,200 दर्ज है।
  • Power Engineerings: बिल क्रमांक 340 में टाइल्स एवं अन्य सामग्री के नाम पर ₹1,01,800 का बिल दिखाई देता है। बिल में GST नंबर का स्थान खाली है।
  • Mahesh Electricals: विद्युत सामग्री के नाम पर लगभग ₹50,000 का भुगतान दर्शाने वाला बिल सामने आया है।
  • D.B. Traders: पाइप एवं अन्य सामग्री के नाम पर ₹17,880 का बिल उपलब्ध है, जिसकी वैधता और भुगतान का सत्यापन आवश्यक है।
  • Power Engineerings: सोलर पंप एवं संबंधित उपकरणों की आपूर्ति और स्थापना के नाम पर ₹3,56,000 का बिल सामने आया है।
  • Power Engineerings: एक अन्य बिल क्रमांक 336 दिनांक 29 नवंबर 2025 में सोलर फोटोवोल्टिक पंप, 5000 लीटर HDPE पानी टंकी और स्टील स्ट्रक्चर स्थापना के नाम पर ₹3,57,000 दर्ज है।
  • JK Son’s Construction: दिनांक 15 अक्टूबर 2025 के बिल में 120 मुरुम के नाम पर ₹60,000 दर्ज है।
  • Bastar Flex: दिनांक 22 जून 2026 के बिल में विभिन्न फ्लेक्स प्रिंटिंग कार्यों के लिए ₹2,430.80 दर्शाए गए हैं।
  • Nityasree Enterprises: दिनांक 8 दिसंबर 2025 के टैक्स इनवॉइस में HP Refurbished CPU के नाम पर ₹15,800 दर्ज है।

जब काम ही नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर?

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ कार्यों का वास्तविक क्रियान्वयन नहीं हुआ, जबकि उनके नाम पर भुगतान दर्ज किया गया है। कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य नहीं होने तथा सामग्री की वास्तविक आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि बिना काम कराए फर्जी या भ्रामक बिलों के आधार पर सरकारी राशि निकाली गई है, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला होगा।

विशेष रूप से सोलर पंप, पानी की टंकी, सीसी सड़क, नलकूप और अन्य निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जाना जरूरी है। केवल कागजों पर कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान कर देना सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा करता है।

ग्रामीणों और वार्ड पंचों के सामने हो सोशल ऑडिट

मामले में मांग की जा रही है कि ग्राम पंचायत बकावंड के समस्त संबंधित निर्माण एवं सामग्री आपूर्ति कार्यों का स्वतंत्र सोशल ऑडिट कराया जाए। इसमें ग्रामीणों, वार्ड पंचों, जनप्रतिनिधियों और शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए। पंचायत के कैशबुक, बिल-वाउचर, मस्टर रोल, माप पुस्तिका (MB), तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति, GST इनवॉइस और बैंक भुगतान का मिलान कराया जाए।

दोषी पाए जाने पर रिकवरी और FIR की मांग

शिकायतकर्ताओं की मांग है कि पूरे मामले की जिला स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिन कार्यों का मौके पर अस्तित्व नहीं है, उनकी वास्तविक स्थिति का पंचनामा तैयार किया जाए। फर्जी बिल, गलत भुगतान अथवा सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर जिम्मेदार सरपंच, सचिव, संबंधित तकनीकी अधिकारियों, भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारियों और दोषी फर्मों के विरुद्ध नियमानुसार FIR दर्ज की जाए।

साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई की जाए तथा सरकारी राशि की ब्याज सहित रिकवरी सुनिश्चित की जाए।

अब प्रशासन से सीधे सवाल

1. क्या जिन कार्यों के नाम पर भुगतान हुआ है, वे वास्तव में धरातल पर पूरे हुए हैं?

2. क्या सभी बिलों पर वैध GST विवरण और आवश्यक कर संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं?

3. सोलर पंप और पानी की टंकी की मौके पर स्थापना एवं कार्यशीलता का सत्यापन किसने किया?

4. क्या निर्माण कार्यों की माप पुस्तिका और गुणवत्ता परीक्षण उपलब्ध हैं?

5. क्या ग्रामीणों और वार्ड पंचों की उपस्थिति में सार्वजनिक सोशल ऑडिट कराया जाएगा?

प्रशासन की जांच से खुलेगा पूरा मामला

यह मामला केवल बिलों का नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत के विकास के लिए आवंटित सरकारी धन की पारदर्शिता और जवाबदेही का है। उपलब्ध दस्तावेजों में दर्ज भुगतान और जमीनी कार्यों के बीच यदि अंतर मिलता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत बकावंड इस मामले में कितनी गंभीरता से जांच कर कार्रवाई करते हैं।

द एंगल आई न्यूज की मांग: पंचायत के सभी संबंधित कार्यों का सार्वजनिक सोशल ऑडिट कराया जाए, जांच रिपोर्ट ग्रामीणों के सामने रखी जाए और सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर दोषियों से वसूली कर FIR दर्ज की जाए।


रिपोर्ट: ओम साहू
द एंगल आई न्यूज | बस्तर

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