

बीजापुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के समापन पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मुरिया दरबार के नाम को लेकर सियासत गरमा गई है। बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने मुरिया दरबार का नाम बदलकर आम दरबार किए जाने की कथित कोशिश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे बस्तर की आदिम परंपरा, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान मिटाने का सुनियोजित षड्यंत्र बताया है।
18 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाला विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासी समाज की आस्था, अस्मिता और जीवन का आधार है। सिरहासार में आयोजित होने वाला मुरिया दरबार बस्तर रियासत की लगभग 150 साल पुरानी जीवंत लोक परंपरा का प्रतीक है। इस परंपरा में मांझी-चालकी और आदिवासी समाज के प्रतिनिधि अपनी समस्याएं एवं मांगें प्रशासन के समक्ष रखते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक परंपरा को ‘आम दरबार’ नाम देकर उसकी मूल पहचान बदलने की कोशिश आदिवासी समाज का अपमान है। यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा गंभीर विषय है।
विधायक मंडावी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बस्तर की जल, जंगल, जमीन और आदिवासी संस्कृति को अपनी सोच के अनुसार बदलने की मानसिकता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले जगदलपुर के प्रसिद्ध माड़िया चौक का नाम बदला गया और अब मुरिया दरबार की पहचान बदलने की कोशिश की जा रही है। नाम परिवर्तन आदिवासियों की ऐतिहासिक पहचान मिटाने की दिशा में पहला कदम है।
मुख्यमंत्री से निर्णय वापस लेने की मांग
विधायक विक्रम मंडावी ने प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग की है कि मुरिया दरबार का नाम बदलने संबंधी निर्णय तत्काल वापस लिया जाए। सभी आधिकारिक दस्तावेजों, आमंत्रण पत्रों और कार्यक्रम सूची में केवल ‘मुरिया दरबार’ नाम का ही उल्लेख किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बस्तर की इस ऐतिहासिक परंपरा के नाम और पहचान के साथ छेड़छाड़ बंद नहीं की गई, तो इसके विरोध में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
विक्रम मंडावी
विधायक, बीजापुर

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