भानुप्रतापपुर मिलावटी शराब कांड: छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई, बड़े अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल

नरेंद्र भवानी

BIS कंपनी और रीजनल ऑफिसर अरुण उपाध्याय की भूमिका की निष्पक्ष जांच, FIR और कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग

कांकेर/भानुप्रतापपुर। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में सामने आए कथित मिलावटी शराब और अवैध पैकेजिंग के मामले ने आबकारी व्यवस्था और शराब दुकानों के संचालन की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ युवा मंच के संस्थापक नरेंद्र भवानी ने इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई किए जाने पर सवाल उठाते हुए BIS कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन और रीजनल ऑफिसर अरुण उपाध्याय की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

नरेंद्र भवानी का आरोप है कि इतने गंभीर मामले में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेही से बचाने का प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शराब दुकानों के संचालन, स्टॉक की निगरानी और नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी कंपनी के अधिकारियों की थी, तो आखिर उनकी जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही है?

रीजनल ऑफिसर की भूमिका की जांच की मांग

भवानी ने मांग की है कि BIS कंपनी के रीजनल ऑफिसर अरुण उपाध्याय के वास्तविक पद, कार्यक्षेत्र और कांकेर-भानुप्रतापपुर क्षेत्र की शराब दुकानों की निगरानी में उनकी भूमिका की आधिकारिक जांच कराई जाए। इसके लिए दौरा रजिस्टर, स्टॉक सत्यापन रिपोर्ट, निरीक्षण रिकॉर्ड और विभागीय पत्राचार की जांच आवश्यक है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।

अवैध पैकेजिंग सामग्री कहां से आई?

मामले में खाली शराब की बोतलों, ढक्कन, स्टीकर और होलोग्राम जैसी पैकेजिंग सामग्री के कथित भंडारण एवं उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने मांग की है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि ऐसी सामग्री कहां से आई, इसके भंडारण और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी तथा संबंधित दुकानों का अंतिम निरीक्षण कब किया गया था।

BIS कंपनी पर कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग की मांग

छत्तीसगढ़ युवा मंच ने मांग की है कि BIS कंपनी के अनुबंधीय दायित्वों और निगरानी व्यवस्था की जांच कराई जाए। यदि कंपनी की लापरवाही अथवा मिलीभगत प्रमाणित होती है तो कारण बताओ नोटिस जारी कर अनुबंध समाप्त करने और कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाए।

आबकारी विभाग की जवाबदेही भी तय हो

भवानी ने आबकारी विभाग के संबंधित अधिकारियों और निरीक्षण टीमों की भूमिका की जांच की मांग करते हुए कहा कि नियमित निरीक्षण की व्यवस्था के बावजूद यदि इस तरह का कथित अवैध कारोबार संचालित होता रहा, तो विभागीय जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

सांसद की भूमिका पर भी उठाए सवाल

नरेंद्र भवानी ने कांकेर सांसद की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिले में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रियता दिखाई देती है, लेकिन मिलावटी शराब जैसे गंभीर जनहित के मामले में बड़े जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई को लेकर स्पष्टता क्यों नहीं है?

उन्होंने सवाल किया कि क्या इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों और जिम्मेदार कंपनी प्रबंधन पर भी कार्रवाई होगी या फिर कार्रवाई केवल निचले कर्मचारियों तक सीमित रह जाएगी? उन्होंने सांसद से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।

जल्द सौंपा जाएगा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ युवा मंच के संस्थापक नरेंद्र भवानी ने बताया कि संगठन जल्द ही सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों को विस्तृत शिकायत एवं ज्ञापन सौंपेगा। इसमें स्वतंत्र और समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल, आवश्यक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने, दोषियों के खिलाफ FIR तथा जांच की प्रगति की लिखित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भानुप्रतापपुर कथित मिलावटी शराब कांड की जांच केवल निचले कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या कंपनी प्रबंधन और आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी?


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