बकावंड पंचायत में लाखों के बिल, धरातल पर विकास गायब! सोलर पंप से लेकर निर्माण सामग्री तक के भुगतान पर उठे सवाल

बकावंड me भ्रष्टाचार का खेल बड़ा है

बस्तर | विशेष खोजी रिपोर्ट

रिपोर्ट: ओम साहू

बकावंड। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर आने वाली सरकारी राशि आखिर कहां खर्च हो रही है? क्या सरकारी दस्तावेजों में विकास कार्य पूरे दिखाकर केवल बिलों के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है? बकावंड ग्राम पंचायत से सामने आए बिल-वाउचर और e-Gram Swaraj के भुगतान रिकॉर्ड ने पंचायत के वित्तीय लेनदेन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में लाखों रुपये के सामान और निर्माण कार्य दिखाए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर उन कार्यों का कोई स्पष्ट अस्तित्व दिखाई नहीं देता।

📌 चार बिलों में ₹5.75 लाख से अधिक का हिसाब, आखिर कहां गया सामान?

सामने आए दस्तावेजों के अनुसार अलग-अलग तारीखों पर सामग्री खरीदी और निर्माण कार्यों के नाम पर चार बिल प्रस्तुत किए गए हैं। इनकी कुल दर्ज राशि ₹5,75,300 है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन बिलों में दर्शाई गई सामग्री वास्तव में खरीदी गई या नहीं और यदि खरीदी गई तो उसका उपयोग पंचायत के किस वार्ड में किया गया?

1. पावर इंजीनियरिंग का ₹3,57,000 का बिल – सोलर पंप और पानी टंकी

दस्तावेज में पावर इंजीनियरिंग, जगदलपुर का इनवॉइस नंबर 336, दिनांक 21 नवंबर 2025 दर्ज है। बिल में सोलर फोटोवोल्टिक पंप सेट, उपयुक्त क्षमता का पंप, राइजिंग पाइप, सक्शन पाइप, फिटिंग, 5000 लीटर HDPE पानी टंकी, लगभग 6 मीटर ऊंचाई पर टंकी स्थापना के लिए गैल्वेनाइज्ड फैब्रिकेटेड स्टील स्ट्रक्चर, स्टैंड, प्लेटफॉर्म और नल आदि का उल्लेख किया गया है।

बिल की कुल राशि: ₹3,57,000

सवाल है कि सोलर पंप कहां स्थापित हुआ? 5000 लीटर की पानी टंकी किस भवन में लगाई गई? उसकी क्षमता, गुणवत्ता, स्थापना स्थल और तकनीकी परीक्षण का रिकॉर्ड कहां है?

2. पावर इंजीनियरिंग का ₹1,48,200 का बिल – लोहे के पाइप और प्रोफाइल शीट

पावर इंजीनियरिंग के इनवॉइस नंबर 339, दिनांक 26 जनवरी 2026 में निम्न सामग्री दर्ज है:

  • MS Square Pipe 2×2 – 40 नग/मात्रा, दर ₹1,200 – राशि ₹48,000
  • MS Square Pipe 2×1½ – 30 नग/मात्रा, दर ₹1,000 – राशि ₹30,000
  • MS Profile Sheet – 26 नग/मात्रा, दर ₹2,700 – राशि ₹70,200

बिल की कुल राशि: ₹1,48,200

इन लोहे के पाइपों और प्रोफाइल शीट का उपयोग किस निर्माण कार्य में हुआ? किस वार्ड में शेड या अन्य निर्माण कराया गया? सामग्री का स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और निर्माण कार्य का माप पुस्तिका (MB) कहां है?

3. नीलाम्बर सेठिया हार्डवेयर का ₹14,900 का बिल

मुख्य मार्ग बकावंड स्थित नीलाम्बर सेठिया हार्डवेयर के बिल क्रमांक 34, दिनांक 14 मई 2025 में 30×2×2 प्रीमियम सामग्री के 20 बॉक्स की खरीदी दर्शाई गई है।

20 बॉक्स × ₹745 = ₹14,900

अब सवाल है कि यह सामग्री किस कार्य के लिए खरीदी गई? किस वार्ड में इसका उपयोग हुआ? सामग्री प्राप्त करने वाले व्यक्ति और उपयोगिता प्रमाणपत्र का रिकॉर्ड कहां है?

4. तरुण शर्मा हार्डवेयर का ₹55,200 का बिल

तरुण शर्मा हार्डवेयर, मुख्य रोड बकावंड के बिल क्रमांक 947, दिनांक 2 फरवरी 2026 में निर्माण सामग्री की खरीदी दर्शाई गई है। उपलब्ध बिल में प्रमुख प्रविष्टियां इस प्रकार दिखाई देती हैं:

  • सीमेंट – 160 बोरी × ₹320 = ₹51,200
  • कील – 20 किलोग्राम × ₹80 = ₹1,600
  • स्क्रू – 10 किलोग्राम × ₹80 = ₹800
  • अन्य सामग्री एवं शेष प्रविष्टियां – लगभग ₹1,600

बिल में दर्ज कुल राशि: ₹55,200

यह सामग्री कहां उपयोग की गई? 160 बोरी सीमेंट से कौन सा निर्माण हुआ? निर्माण स्थल, मजदूरों की उपस्थिति, मटेरियल खपत और तकनीकी माप का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।

💰 चार बिलों का कुल हिसाब – ₹5,75,300

क्रमांकफर्म/विवरणराशि 1पावर इंजीनियरिंग – सोलर पंप एवं पानी टंकी₹3,57,000 2पावर इंजीनियरिंग – पाइप एवं प्रोफाइल शीट₹1,48,200 3नीलाम्बर सेठिया हार्डवेयर – सामग्री₹14,900 4तरुण शर्मा हार्डवेयर – निर्माण सामग्री₹55,200 कुल बिल राशि₹5,75,300

महत्वपूर्ण: यह उपलब्ध चार बिलों में दर्ज राशि का जोड़ है। इसे वास्तविक भुगतान या प्रमाणित सरकारी गबन की राशि नहीं माना जा सकता। इसके लिए e-Gram Swaraj के संबंधित वाउचर, बैंक भुगतान और मूल लेखा अभिलेखों का मिलान जरूरी है।

⚠️ e-Gram Swaraj रिकॉर्ड में ₹14,000 का अलग भुगतान भी

e-Gram Swaraj के उपलब्ध  में वित्तीय वर्ष 2025-26, फरवरी माह का एक भुगतान वाउचर दिखाई देता है। इसमें 28 फरवरी 2026 को नेशनल ओल्ड एज पेंशन स्कीम के अंतर्गत ₹14,000 का भुगतान पेंशनधारकों के लिए दर्ज है।

इस भुगतान को निर्माण सामग्री के बिलों से अलग रखा जाना चाहिए। हालांकि इसकी पात्रता, लाभार्थियों और बैंक भुगतान का रिकॉर्ड भी नियमानुसार सत्यापित किया जाना चाहिए।

🚨 ग्रामीणों का आरोप – बिल लगाए गए, लेकिन काम दिखाई नहीं दे रहा

ग्रामीणों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि पंचायत में विकास कार्यों और सामग्री खरीदी के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका आरोप है कि पंचायत निधि का दुरुपयोग किया गया और सरकारी धन का वास्तविक विकास कार्यों में उपयोग नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पंचायत निधि से कथित तौर पर निजी यात्राओं और अन्य गतिविधियों पर भी खर्च किया गया। ग्रामीणों की मांग है कि पिछले कई वर्षों के पंचायत खाते, बैंक लेनदेन, बिल-वाउचर और सभी निर्माण कार्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। संबंधित सरपंच, सचिव और अन्य जिम्मेदार पक्षों का जवाब भी जांच के दौरान लिया जाना चाहिए।

🔍 सभी वार्डों में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के सामने हो खुली जांच

इस मामले में बंद कमरे में कागजी जांच पर्याप्त नहीं होगी। ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत के सभी वार्डों में जनप्रतिनिधियों, पंचों, ग्रामीणों और स्वतंत्र तकनीकी अधिकारियों की मौजूदगी में भौतिक सत्यापन कराया जाए।

  • सभी वार्डों में भुगतान के अनुसार निर्माण कार्यों का स्थल निरीक्षण हो।
  • सोलर पंप, पानी टंकी और स्टील स्ट्रक्चर की वास्तविक स्थिति देखी जाए।
  • खरीदी गई सामग्री की मात्रा और उपयोग का मिलान किया जाए।
  • सप्लायरों के मूल बिल, GST रिटर्न और बैंक लेनदेन की जांच हो।
  • माप पुस्तिका (MB), तकनीकी स्वीकृति और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र की जांच हो।
  • ग्रामसभा में सभी भुगतान और खर्च का हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
  • शिकायतकर्ताओं और गवाहों के बयान गोपनीय तरीके से दर्ज किए जाएं।

⚖️ भ्रष्टाचार प्रमाणित हुआ तो क्या होगी कार्रवाई?

यदि जांच में फर्जी बिलिंग, बिना कार्य भुगतान, सरकारी धन का गबन, कूटरचित दस्तावेज या वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार निम्न कार्रवाई की मांग की जा सकती है:

  • विशेष वित्तीय ऑडिट और सोशल ऑडिट।
  • दोषपूर्ण भुगतान की राशि की वसूली।
  • जिम्मेदार अधिकारियों और पदाधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई।
  • फर्जी बिल और GST अनियमितता की जांच तथा आवश्यकतानुसार GST विभाग की कार्रवाई।
  • गबन, धोखाधड़ी और जालसाजी के प्रमाण मिलने पर FIR।
  • गंभीर वित्तीय अपराध सामने आने पर सक्षम जांच एजेंसी से जांच।
  • अपराध सिद्ध होने पर न्यायालय में अभियोजन और कानून के अनुसार सजा।

📢 तथाकथित क्लीन चिट और धमकियों से नहीं दबेगा सवाल!

जांच से पहले सर्टिफिकेट बाट रहे ये

ग्रामीणों का आरोप है कि भ्रष्टाचार के सवाल उठने के बाद कुछ लोग कथित तौर पर अपने पक्ष में खबरें प्रकाशित करवाकर खुद को पाक-साफ साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने कानूनी कार्रवाई की धमकी दिए जाने की बात भी कही है।

ग्रामीणों का दावा है कि मामले की शिकायत मंत्रालय, GST विभाग, सामाजिक अंकेक्षण से संबंधित विभागों और प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजी गई है। अब शिकायतों पर हुई कार्रवाई और जांच की स्थिति सार्वजनिक होनी चाहिए।

किसी के पक्ष में खबर प्रकाशित होने या किसी के खंडन से सरकारी दस्तावेजों में दर्ज लेनदेन का सत्यापन समाप्त नहीं हो जाता। यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो संबंधित जिम्मेदार लोग मूल दस्तावेज, कार्यस्थल और भुगतान रिकॉर्ड सार्वजनिक कर सकते हैं।

🎯 प्रशासन से सीधे सवाल – जवाब कौन देगा?

  • ₹3.57 लाख के सोलर पंप और पानी टंकी की स्थापना कहां हुई?
  • ₹1.48 लाख के पाइप और प्रोफाइल शीट किस निर्माण में इस्तेमाल हुए?
  • 20 बॉक्स प्रीमियम सामग्री का उपयोग किस वार्ड में हुआ?
  • 160 बोरी सीमेंट से कौन सा निर्माण कार्य पूरा किया गया?
  • सामग्री खरीदी की गुणवत्ता और मात्रा का सत्यापन किसने किया?
  • भुगतान से पहले तकनीकी अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया था या नहीं?
  • क्या सभी भुगतान के लिए वैध प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति उपलब्ध है?
  • यदि काम हुआ है तो उसकी तस्वीरें, जियो-टैगिंग और माप पुस्तिका सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?

हमारी मांग: कलेक्टर बस्तर और जिला पंचायत CEO तत्काल संयुक्त जांच दल गठित करें। जांच सभी वार्डों में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हो। बिलों, GST रिकॉर्ड, बैंक भुगतान, तकनीकी स्वीकृति और वास्तविक निर्माण कार्यों का मिलान किया जाए। शिकायत सही पाए जाने पर दोषियों से पूरी राशि की वसूली कर वैधानिक एवं आपराधिक कार्रवाई की जाए।

जनता के विकास का पैसा किसी की निजी संपत्ति नहीं है। पंचायत का हिसाब जनता को मिलना चाहिए। सवाल साफ है – बिलों में विकास हुआ है तो जमीन पर दिखाई क्यों नहीं देता?

रिपोर्ट: ओम साहू |एडिटर इन चीफ The eagle eye news

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों एवं ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध दोष सिद्ध होने का दावा नहीं किया जा रहा है। संबंधित पक्षों का जवाब मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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