बस्तर में लखपति दीदी योजना पर बड़ा सवाल!

सरकारी आंकड़ों की पड़ताल | विशेष खोजी रिपोर्ट

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बकावंड में 12 हजार लखपति दीदी, जिले में कुल 8,900! सरकारी पोर्टल के आंकड़ों में बड़ा अंतर

रिपोर्ट: ओम साहू

महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की लखपति दीदी योजना के तहत बस्तर जिले में जारी आंकड़े चर्चा का विषय बन गए हैं। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल पर जिले की कुल संख्या 8,900 दिखाई गई है, जबकि अकेले बकावंड विकासखंड में 12,083 लखपति दीदियां दर्ज हैं।

सबसे बड़ा सवाल:
जब पूरे बस्तर जिले में 8,900 लखपति दीदियां हैं, तो बकावंड में अकेले 12,083 का आंकड़ा कैसे? क्या अलग-अलग श्रेणियों या समयावधि के आंकड़े हैं? प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

विकासखंडवार रैंकिंग

रैंक विकासखंड संख्या 01बकावंड12,083 02बस्तर8,900 03तोकापाल7,162 04जगदलपुर6,106 05लोहंडीगुड़ा5,507 06बास्तानार4,526 07दरभा3,537

बस्तर जिले का आधिकारिक ओवरव्यू

स्व-सहायता समूह2,600 कुल सदस्य30,600 निर्धारित लक्ष्य8,800 संभावित लखपति दीदियां14,900 कुल लखपति दीदियां8,900 लक्ष्य उपलब्धि101.53%

वार्षिक आय के आधार पर लाभार्थी

  • ₹1-2 लाख : 8,600
  • ₹2-3 लाख : 195
  • ₹3-4 लाख : 50
  • ₹4-5 लाख : 40
  • ₹5-10 लाख : 12
  • ₹10 लाख से अधिक : 2

आजीविका के प्रमुख स्रोत

  • फसल आधारित गतिविधियां : 8,400
  • पशुपालन : 4,300
  • लघु वनोपज : 3,500
  • मत्स्य पालन : 4
  • विनिर्माण : 253
  • व्यापार : 1,100
  • सेवाएं : 386
  • मजदूरी : 7,100
  • नियमित आय : 5,800

प्रशासन से जवाब मांगते 8 सवाल

  1. बकावंड में 12,083 और जिले में कुल 8,900 का आंकड़ा क्यों?
  2. सातों विकासखंडों के आंकड़ों का जिला स्तर पर मिलान हुआ है?
  3. ग्राम पंचायतवार लाभार्थियों की सूची कहां उपलब्ध है?
  4. लाभार्थियों की वास्तविक वार्षिक आय का सत्यापन किसने किया?
  5. डिजिटल आजीविका रजिस्टर में कितनी महिलाओं का रिकॉर्ड अपडेट है?
  6. कितनी महिलाओं को बैंक ऋण और सरकारी सहायता मिली?
  7. क्या सभी लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन हुआ है?
  8. योजना का स्वतंत्र ऑडिट कब कराया गया?

योजना की सफलता के साथ पारदर्शिता भी जरूरी

लखपति दीदी योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। योजना की वास्तविक सफलता का आकलन तभी संभव है जब सरकारी आंकड़े, लाभार्थियों की वास्तविक आय और जमीनी स्थिति एक-दूसरे से मेल खाएं। जिला पंचायत और बिहान मिशन को आंकड़ों का मिलान कर स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।

स्रोत: भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय

रिपोर्ट: ओम साहू


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