बकावंड पंचायत में विकास कार्यों की राशि पर सवाल! स्ट्रीट लाइट बंद, राशन दुकान शेड और सीसी रोड मेंटेनेंस के खर्च की जांच की मांग

शेड गायब पैसा अंदर

बकावंड, बस्तर। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर आने वाली सरकारी राशि का उपयोग आखिर कहां और कैसे हो रहा है? जनता को बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं? बकावंड क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों ने पंचायत स्तर पर कराए गए विकास कार्यों और उनके रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में कई स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हैं। वहीं शासकीय उचित मूल्य दुकान के शेड निर्माण तथा सीसी रोड के मेंटेनेंस पर खर्च की गई राशि को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन कार्यों के लिए सरकारी बजट जारी हुआ है तो उसका वास्तविक लाभ जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

🔴 स्ट्रीट लाइट बंद, अंधेरे में गुजरने को मजबूर ग्रामीण

क्षेत्र में लगे बिजली के खंभों और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। तस्वीरों में बिजली के खंभों पर तारों का जाल और अव्यवस्थित विद्युत कनेक्शन दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइट बंद हैं।

सवाल यह है कि यदि स्ट्रीट लाइट लगाने, बिजली बिल, मरम्मत और रखरखाव के नाम पर पंचायत निधि से भुगतान हुआ है तो उसका लाभ ग्रामीणों को क्यों नहीं मिल रहा है? कितनी लाइटें लगाई गईं, कितनी चालू हैं और मरम्मत के नाम पर कितना भुगतान हुआ? इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।

🔴 राशन दुकान शेड निर्माण की राशि का हिसाब सार्वजनिक हो

क्षेत्र में स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान की तस्वीर सामने आई है। ग्रामीणों ने राशन दुकान के शेड निर्माण एवं उससे संबंधित खर्च की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

निर्माण कार्य के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई? निर्माण किस एजेंसी या ठेकेदार ने किया? भुगतान किसके खाते में हुआ? निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण किस अधिकारी ने किया? क्या कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी हुआ?

इन सवालों का जवाब संबंधित पंचायत और विभागीय अधिकारियों को दस्तावेजों के साथ देना चाहिए।

🔴 सीसी रोड मेंटेनेंस के नाम पर खर्च की जांच की मांग

क्षेत्र की सीसी सड़कों और उनके रखरखाव को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण और मेंटेनेंस के नाम पर यदि सरकारी राशि खर्च की गई है तो उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

संबंधित कार्यों का तकनीकी मूल्यांकन, माप पुस्तिका (Measurement Book), कार्यादेश, सामग्री खरीदी के बिल, भुगतान वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र की जांच होनी चाहिए।

🔍 पंचायत के किन दस्तावेजों की जांच जरूरी?

  • पंचायत निधि और अन्य सरकारी योजनाओं के बैंक स्टेटमेंट।
  • स्ट्रीट लाइट खरीदी, स्थापना और मरम्मत के बिल।
  • बिजली बिल और भुगतान की जानकारी।
  • राशन दुकान शेड निर्माण की स्वीकृति और तकनीकी प्राक्कलन।
  • निर्माण सामग्री के GST बिल और भुगतान वाउचर।
  • सीसी रोड निर्माण एवं मेंटेनेंस की माप पुस्तिका।
  • कार्यादेश, मूल्यांकन रिपोर्ट और पूर्णता प्रमाण पत्र।
  • ग्रामसभा प्रस्ताव और पंचायत की कार्यवाही रजिस्टर।
  • सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) की रिपोर्ट।
  • पंचायत के सभी कार्यों की जियो टैग फोटो और स्थल निरीक्षण रिपोर्ट।

⚖️ दोष सिद्ध होने पर क्या हो सकती है कार्रवाई?

यदि जांच में सरकारी राशि के दुरुपयोग, फर्जी बिल, घटिया निर्माण, फर्जी भुगतान या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

  • विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई।
  • दोषी पाए जाने पर पद से हटाने की वैधानिक प्रक्रिया।
  • गबन या अनियमित भुगतान की राशि की वसूली।
  • फर्जी बिल और GST संबंधी अनियमितताओं पर संबंधित विभाग द्वारा जांच।
  • आवश्यक साक्ष्य मिलने पर FIR एवं आपराधिक कार्रवाई।
  • निर्माण कार्यों का तकनीकी ऑडिट और पुनर्मूल्यांकन।
  • सामाजिक अंकेक्षण और ग्रामसभा में सार्वजनिक जवाबदेही।

📢 ग्रामीणों की मांग – सभी वार्डों में हो खुली जांच

स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत के सभी वार्डों में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच के दौरान प्रत्येक कार्य का स्थल निरीक्षण किया जाए तथा स्वीकृत राशि, वास्तविक निर्माण, बिल, भुगतान और गुणवत्ता का मिलान किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखी जानी चाहिए। जांच रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

📰 अब जवाबदेही तय करने का समय

पंचायत का पैसा किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि जनता के विकास के लिए मिलने वाली सरकारी राशि है। इसलिए प्रत्येक रुपये का हिसाब जनता को मिलना चाहिए।

द ईगल आई न्यूज इस मामले में संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों, सचिव, जनपद पंचायत, जिला पंचायत और संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा। संबंधित अधिकारियों से अनुरोध है कि वे स्वीकृत कार्यों, बिलों, भुगतान और जांच की स्थिति पर अपना आधिकारिक पक्ष प्रस्तुत करें।

नोट: यह खबर स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी, ग्रामीणों के आरोप और उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर जनहित में प्रकाशित की जा रही है। वित्तीय अनियमितता या गबन की पुष्टि सक्षम विभागीय जांच एवं दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही मानी जाएगी। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर है।


सच की नजर तीखी और निडर

रिपोर्ट: ओम साहू
द ईगल आई न्यूज, बस्तर

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