
रथ हादसे के मृतक परिवार को एक करोड़ मुआवजा और घायलों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव पारित, दशहरा समिति में मांझी-चालकी और मूलनिवासी समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग।
जगदलपुर। बस्तर दशहरा पर्व की पारंपरिक व्यवस्थाओं, धार्मिक रीति-रिवाजों और आदिवासी समाज की भागीदारी को लेकर सर्व आदिवासी मूलनिवासी समाज जिला बस्तर ने कड़ा रुख अपनाया है। रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को संभागीय धुरवा समाज भवन, तेतरखुटी जगदलपुर में आयोजित अति आवश्यक बैठक में बस्तर दशहरा 2026 के दौरान परंपराओं के कथित उल्लंघन और गैर लोगों के हस्तक्षेप पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई। बैठक में विभिन्न समाजों के प्रमुखों एवं प्रतिनिधियों की उपस्थिति में 15 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श कर निर्णय लिए गए।
रथ हादसे के पीड़ित परिवारों को मुआवजा और नौकरी देने की मांग
बैठक में बस्तर दशहरा रथ खींचने के दौरान हुए हादसे में मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने तथा घायल परिवारों के एक-एक सदस्य को चतुर्थ श्रेणी शासकीय नौकरी प्रदान करने का प्रस्ताव पारित किया गया। पीड़ित परिवारों के परिजनों ने समाज प्रमुखों को ज्ञापन सौंपा है। समाज की ओर से सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की बात कही गई है।
दशहरा समिति में पारंपरिक समाज प्रमुखों को प्रतिनिधित्व देने की मांग
बैठक में निर्णय लिया गया कि दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद पर मांझी-चालकी तथा बस्तरिया मूलनिवासी समाज के पारंपरिक प्रतिनिधियों को स्थान दिया जाना चाहिए। साथ ही दशहरा समिति में मांझी-चालकी और सर्व मूलनिवासी बस्तरिया समाज के समाज प्रमुखों को शामिल करने की मांग की गई।
समाज ने मांग की कि आगामी बस्तर दशहरा की संपूर्ण कार्यक्रम रूपरेखा मांझी-चालकी, समाज प्रमुखों, सिरहा-गुनिया एवं पारंपरिक प्रतिनिधियों की सहमति से तैयार की जाए।
देवी-देवताओं के छत्रों के साथ व्यवहार पर जताई आपत्ति
बैठक में दशहरा पर्व के दौरान पेन-पुरखों, अंगा देव एवं ग्रामीण अंचलों से आने वाले पेन प्रमुखों, जिम्मेदारों, गांव गोसिन और छत्रों को एक स्थान पर व्यवस्थित रखने की मांग की गई।
समाज ने देवी-देवताओं के छत्रों को कतार में खड़ा कर चावल, दाल एवं राशन सामग्री वितरित करने की व्यवस्था को अपमानजनक बताते हुए सिरे से खारिज किया। साथ ही मांग की गई कि 84 परगना मांझी के देव छत्रों एवं अंगा देव की सूची दशहरा समिति के सचिव द्वारा पहले सार्वजनिक की जाए।
राष्ट्रपति के कार्यक्रम और पारंपरिक प्रतिनिधित्व पर भी सवाल
बैठक में वर्ष 2026 के बस्तर दशहरा आयोजन के दौरान जोगी को घर वापस भेजे जाने, कारीगरों को निर्धारित समय से पहले भेजने तथा राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान काछन देवी की परंपरा से जुड़ी पीहूदास से मुलाकात नहीं कराए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। समाज ने इन घटनाओं को पारंपरिक व्यवस्थाओं की अनदेखी बताते हुए अस्वीकार किया।
इसके अलावा दंतेश्वरी टेंपल समिति में भी सर्व मूलनिवासी बस्तरिया समाज के प्रतिनिधियों को सदस्य बनाए जाने की मांग रखी गई।
रथ खींचने वालों और कारीगरों का बीमा कराने की मांग
समाज ने आगामी दशहरा पर्व में रथ खींचने वाले लोगों और रथ निर्माण में लगे कारीगरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की। इसके लिए सभी संबंधित लोगों का बीमा कराने का प्रस्ताव रखा गया।
बैठक में यह भी कहा गया कि मांझी-चालकी के कथित हस्तक्षेप के कारण निर्धारित तिथि पर मावली परघाव की परंपरा का निर्वहन नहीं हो पाने की स्थिति सामने आई, जिस पर समाज ने चिंता व्यक्त की।
संभागीय स्तर पर होगी अगली बैठक
बैठक में निर्णय लिया गया कि आगामी कार्ययोजना संभाग के सभी परगना मांझियों और सर्व आदिवासी मूलनिवासी समाज के समन्वय से तैयार की जाएगी। इसके लिए सिरहासार भवन में संभागीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी मांझी एवं बस्तर संभाग के मूलनिवासी समाज के पदाधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य रखने पर जोर दिया गया।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन की चेतावनी
बैठक के अंत में समाज प्रमुखों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि बस्तर दशहरा की पारंपरिक व्यवस्थाओं में बस्तरिया मूलनिवासी समाज और मांझी-चालकी की भूमिका एवं सहमति की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि समाज की मांगों और पारंपरिक अधिकारों की अवहेलना जारी रहती है तो आगामी समय में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ये प्रमुख पदाधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर, हिडमो मांडवी (कोया कुटमा समाज संभाग अध्यक्ष), दिनेश यदु (ओबीसी समाज महासभा अध्यक्ष बस्तर संभाग), बलराम मांझी (दशहरा समिति उपाध्यक्ष), लक्ष्मण कश्यप, पप्पू राम नाग (धुरवा समाज संभाग अध्यक्ष), बलदेव मौर्य (सर्व आदिवासी समाज संरक्षक), लोकनाथ नाग (हल्बा समाज अध्यक्ष), एन.एस. सेवता (गोंडवाना समाज अध्यक्ष), रघुवंश यादव, डॉ. जीवन सलाम, गंगा नाग, संतु मौर्य, राजेंद्र मांझी, माखनलाल शोरी, बसंत कश्यप, तुलसी मंडावी, नीलकंठ ठाकुर, लखेश्वर कश्यप, बनसिंह मौर्य, लक्ष्मीनाथ कश्यप, वट्टी पांडु सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: ओम साहू The Eagle Eye News | बस्तर

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