नलपावंड में जल जीवन मिशन की पोल! कुछ घरों में पाइप बिछाकर छोड़ा, पानी की टंकी अधूरी, ₹66 लाख खर्च

पानी टंकी की जगह झाड़ी की टंकी

सरकारी डाटा में 198.18 लाख रुपये की योजना, 66.16 लाख रुपये व्यय दर्ज; मौके पर पानी की टंकी का निर्माण अधूरा, ग्रामीणों को जलापूर्ति पर उठे सवाल

जगदलपुर/बस्तर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के क्रियान्वयन को लेकर बस्तर जिले की जनपद पंचायत बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नलपावंड में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी डाटा पर लाखों रुपये खर्च होने का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

मौके पर मिली जानकारी और तस्वीरों के अनुसार गांव के घरों तक पाइपलाइन तो बिछाई नहीं गई है, और पानी की टंकी का निर्माण अब तक अधूरा नजर आ रहा है। टंकी के निर्माण स्थल पर केवल सरिया खड़ी दिखाई दे रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पानी की टंकी ही पूरी तरह तैयार नहीं हुई, तो ग्रामीणों को नियमित पेयजल उपलब्ध कराने का दावा कितना वास्तविक है?

सरकारी डाटा पर 66.16 लाख रुपये खर्च का रिकॉर्ड

जल शक्ति मंत्रालय के जल जीवन मिशन के आधिकारिक  27 अक्टूबर 2026 की स्थिति में ग्राम नलपावंड की योजना का विवरण दर्ज है। इसके अनुसार रेट्रोफिटिंग पाइप्ड वाटर सप्लाई योजना की स्वीकृत लागत 198.18 लाख रुपये है। पर अब तक 66.16 लाख रुपये का व्यय दर्ज किया गया है। योजना की स्थिति अभी भी ‘Ongoing’ यानी प्रगतिरत बताई गई है।

427 परिवारों में 357 नल कनेक्शन का दावा

डाटा के अनुसार ग्राम पंचायत में कुल 427 परिवार हैं, जिनमें 357 परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दर्ज है। वहीं 70 परिवारों के नल कनेक्शन शेष बताए गए हैं। हालांकि नल कनेक्शन दर्ज होना और घरों में नियमित पानी पहुंचना दो अलग-अलग बातें हैं। इसकी वास्तविकता का भौतिक सत्यापन आवश्यक है।

नौ बसाहटों में जलापूर्ति की स्थिति पर सवाल

डाटा के आंकड़ों के अनुसार विशेष रूप से सिरहापारा में 53 में से केवल 15 परिवारों को नल कनेक्शन दिए गए हैं। यहां 38 परिवारों के कनेक्शन शेष हैं। सुंडीपारा-1 में 95 परिवारों में से 70 को कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि 25 परिवार अभी भी वंचित हैं। पुजारीपारा-2 में भी 18 में से 7 परिवारों के कनेक्शन शेष हैं।

जब टंकी अधूरी तो पानी कहां से पहुंचेगा?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल पानी की टंकी के निर्माण को लेकर है। यदि निर्माण स्थल पर अभी भी केवल सरिया खड़ी है और टंकी तैयार नहीं हुई है, तो योजना के तहत घरों तक नियमित पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था कैसे संचालित हो रही है?

क्या पाइपलाइन बिछाने और नल कनेक्शन लगाने को ही योजना की सफलता मान लिया गया है? क्या संबंधित अधिकारियों ने निर्माण कार्य का वास्तविक भौतिक सत्यापन किया है? क्या कार्य की गुणवत्ता और भुगतान की प्रक्रिया की जांच की गई है?

अधिकारिक डेटा पर परिसंपत्तियों का विवरण भी शून्य

जल जीवन मिशन के डाटा पर योजना की परिसंपत्ति संबंधी जानकारी में कुल स्टोरेज स्ट्रक्चर की संख्या शून्य और अन्य परिसंपत्तियों की संख्या भी शून्य दर्ज दिखाई देती है। वहीं योजना का संचालन एवं रखरखाव करने वाले कर्मचारियों की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। इन प्रविष्टियों की विभागीय जांच जरूरी है।

इन अधिकारियों से जवाब चाहती है जनता

  • ग्राम पंचायत नलपावंड में पानी की टंकी का निर्माण कब तक पूरा होना था?
  • 66.16 लाख रुपये का व्यय किन-किन कार्यों पर किया गया?
  • ठेकेदार को अब तक कितनी राशि का भुगतान किया गया?
  • क्या अधूरे निर्माण के बावजूद कार्यों का मूल्यांकन और भुगतान किया गया?
  • 357 नल कनेक्शनों में कितने घरों में वास्तव में नियमित पानी पहुंच रहा है?
  • शेष 70 परिवारों को कब तक पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा?
  • क्या इस योजना का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाएगा?

सोशल ऑडिट और उच्चस्तरीय जांच की मांग

ग्राम पंचायत नलपावंड में जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत राशि, अब तक हुए व्यय, निर्माण की गुणवत्ता, पाइपलाइन विस्तार, पानी की टंकी और वास्तविक जलापूर्ति की स्थिति की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। संबंधित विभाग से कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका (MB), भुगतान विवरण और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र सार्वजनिक करने की मांग की जानी चाहिए।

साथ ही ग्रामसभा के माध्यम से सोशल ऑडिट कराकर ग्रामीणों से वास्तविक जलापूर्ति की जानकारी ली जानी चाहिए। यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

द ईगल आई न्यूज़ के तीखे सवाल

कागजों में नल कनेक्शन, जमीन पर अधूरी पानी की टंकी और सरकारी रिकॉर्ड में लाखों का खर्च! आखिर नलपावंड के ग्रामीणों को कब मिलेगा हर घर जल का वास्तविक लाभ?


रिपोर्ट: ओम साहू
The Eagle Eye News | सच की नजर तीखी और निडर

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