कचनार लैम्प्स घोटाले की जांच शुरू! KCC खातों से कथित अवैध निकासी और फर्जी हस्ताक्षर पर सहकारिता विभाग सख्त, कल आमने-सामने होंगे किसान और प्रबंधक

कल होगी जांच

बस्तर | विशेष पड़ताल | The Eagle Eye News

किसानों की शिकायत के बाद सहकारिता विभाग ने जारी किया जांच नोटिस। चार शिकायत क्रमांकों और 12 बिंदुओं पर मांगा गया जवाब। 3 नवंबर को सुबह 11 बजे कचनार लैम्प्स में उपस्थित रहने के निर्देश।

किसानों की शिकायत पर विभाग की कार्रवाई, जांच की तारीख तय

बस्तर। बकावंड विकासखंड के कचनार स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति (लैम्प्स) में किसानों के KCC ऋण खातों से कथित अनधिकृत राशि निकासी, फर्जी हस्ताक्षर से खाद आहरण, समिति के संचालन में बाहरी हस्तक्षेप और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों के बीच अब सहकारिता विभाग ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कार्यालय उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जगदलपुर द्वारा जारी कार्यालयीन पत्र क्रमांक 608, दिनांक 02 नवंबर 2026 के माध्यम से संबंधित पक्षों को 03 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे कचनार लैम्प्स में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कचनार लैम्प्स के संबंध में 12 बिंदुओं पर शिकायत प्राप्त हुई है। इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच एवं निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों और पक्षकारों को उपस्थित रहने कहा गया है।

चार शिकायत क्रमांक, जांच के दायरे में KCC और खाद वितरण

विभागीय पत्र में निम्नलिखित शिकायत क्रमांकों का उल्लेख किया गया है:

  • WP 261000254257
  • WP 261000254254
  • WP 261000254258
  • WP 261000254255

इन शिकायतों का मुख्य विषय पिछले दो वर्षों में किसानों के KCC खातों से कथित अनधिकृत राशि निकासी, फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से खाद आहरण, समिति संचालन में बाहरी हस्तक्षेप तथा वित्तीय अनियमितताओं की विशेष जांच और सोशल ऑडिट कराना है।

₹28 हजार और ₹11,359 के मामलों ने खड़े किए सवाल

इस पूरे प्रकरण में किसान बुधराम द्वारा KCC खाते से कथित रूप से ₹28,000 निकाले जाने की शिकायत की गई थी। किसान का आरोप है कि उन्होंने स्वयं यह राशि नहीं निकाली थी।

वहीं किसान श्यामलाल कश्यप ने आरोप लगाया कि उनके नाम पर कथित फर्जी हस्ताक्षर कर ₹11,359 की खाद निकाल ली गई, जबकि उन्होंने खाद प्राप्त करने के लिए हस्ताक्षर नहीं किए थे और न ही किसी अन्य व्यक्ति को अनुमति दी थी।

मामला सामने आने के बाद ₹11,359 की राशि उनके ऋण खाते में वापस जमा किए जाने की बात भी सामने आई। हालांकि, राशि वापस जमा होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि खाद का वास्तविक वितरण किसे हुआ और कथित हस्ताक्षर किसने किए।

प्रबंधक के पति के हस्तक्षेप को लेकर भी शिकायत

कचनार लैम्प्स के संचालन को लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। 11 सितंबर 2025 को कलेक्टर बस्तर को सौंपे गए आवेदन में समिति प्रबंधक के पति द्वारा समिति के कार्यों में कथित हस्तक्षेप किए जाने का आरोप लगाया गया था।

आवेदन में खाद वितरण, वाउचर तैयार करने, KCC प्रकरण और धान खरीदी से जुड़े कार्यों में हस्तक्षेप की बात कही गई थी। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना भी आवश्यक है।

3 नवंबर को होगी जांच, इन सवालों के जवाब जरूरी

अब विभागीय जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होंगे:

  1. किसानों के KCC खातों से निकाली गई रकम किसने और किस माध्यम से प्राप्त की?
  2. क्या किसानों के हस्ताक्षर और अनुमति के बिना खाद का आहरण किया गया?
  3. खाद वितरण रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक में कितना अंतर है?
  4. किसानों के नाम पर जारी खाद वास्तव में किन लोगों को दी गई?
  5. क्या समिति के वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों में अनधिकृत व्यक्तियों का हस्तक्षेप हुआ?
  6. पिछले दो वर्षों में अन्य किसानों के खातों में भी ऐसी अनियमितताएं हुई हैं?

इन सवालों का जवाब केवल मौखिक बयान से नहीं, बल्कि मूल दस्तावेजों, बैंक स्टेटमेंट, KCC लेजर, खाद वितरण रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रसीद और भुगतान वाउचर के मिलान से ही सामने आ सकता है।

सिर्फ बैठक नहीं, पूरे दो साल का सोशल ऑडिट जरूरी

कचनार लैम्प्स में सामने आए मामलों को देखते हुए जांच का दायरा केवल दो किसानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समिति के पिछले दो वर्षों के सभी किसानों के KCC खातों, खाद वितरण और वित्तीय लेनदेन का स्वतंत्र सोशल ऑडिट कराया जाना चाहिए।

यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही किसानों को जांच की निष्पक्ष रिपोर्ट उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

THE EAGLE EYE NEWS का सवाल:
क्या कचनार लैम्प्स की जांच में किसानों को न्याय मिलेगा? क्या KCC खातों और खाद वितरण के पूरे रिकॉर्ड की जांच होगी? क्या कथित फर्जी हस्ताक्षरों की सत्यता सामने आएगी? अब निगाहें 3 नवंबर की विभागीय जांच पर टिकी हैं।

किसानों के हक और सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़े इस मामले में जांच के नतीजे बेहद महत्वपूर्ण होंगे।


रिपोर्ट: ओम साहू
The Eagle Eye News | बस्तर
सच की नजर तीखी और निडर

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