
KCC खातों से कथित राशि निकासी, फर्जी हस्ताक्षर और खाद वितरण में गड़बड़ी के आरोपों की जांच के बीच नया सवाल: जब जांच टीम पहुंची तो लैम्प्स कार्यालय ही क्यों बंद मिला?
जगदलपुर/बकावंड। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत कचनार आदिम जाति सेवा सहकारी समिति (लैम्प्स) में कथित वित्तीय अनियमितताओं और किसानों के साथ हुए व्यवहार को लेकर मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों और लिखित शिकायतों के बाद सहकारिता विभाग ने मामले की जांच शुरू की है। लेकिन जांच के दौरान लैम्प्स कार्यालय बंद मिलने और प्रबंधक, ऑपरेटर सहित किसी भी कर्मचारी के उपस्थित नहीं रहने से पूरी जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच के दिन लैम्प्स बंद, जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी नदारद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कचनार लैम्प्स से संबंधित शिकायतों की जांच एवं निराकरण के लिए 3 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार जांच के दौरान लैम्प्स कार्यालय में ताला लटका मिला। मौके पर न तो प्रबंधक उपस्थित थे, न ऑपरेटर और न ही कोई अन्य कर्मचारी मौजूद था।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसानों की गंभीर शिकायतों की जांच होनी थी, तब संबंधित संस्था के जिम्मेदार कर्मचारी कार्यालय में मौजूद क्यों नहीं थे? क्या विभागीय जांच को गंभीरता से लिया जा रहा है या फिर किसानों को केवल औपचारिक प्रक्रिया में उलझाया जा रहा है?
KCC खातों से राशि निकासी और फर्जी हस्ताक्षर के आरोप
किसानों की शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कचनार लैम्प्स में कुछ किसानों के KCC खातों से कथित तौर पर बिना जानकारी और अनुमति के राशि निकाली गई। इसके अलावा खाद वितरण में फर्जी हस्ताक्षर और किसानों के नाम पर खाद निकासी किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, एक किसान के खाते से लगभग 28 हजार रुपये की कथित निकासी का मामला सामने आया है। वहीं खाद वितरण से जुड़े दस्तावेजों में 11,359 रुपये की निकासी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध बैंक संदेश और शिकायत दस्तावेजों के आधार पर इन लेन-देन की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
किसानों का आरोप है कि कुछ मामलों में उनके नाम पर खाद जारी किए जाने की जानकारी उन्हें बाद में मिली, जबकि उन्होंने स्वयं खाद प्राप्त करने के लिए हस्ताक्षर नहीं किए थे। किसानों ने संबंधित दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर और बैंक रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
किसानों ने लिखित बयान देकर लगाए गंभीर आरोप
मामले में कई किसानों ने लिखित शिकायत एवं बयान प्रस्तुत किए हैं। शिकायतों में कथित फर्जी हस्ताक्षर, खाद वितरण में अनियमितता, KCC खातों से राशि निकासी और किसानों के साथ दुर्व्यवहार जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें खाद के लिए परेशान किया गया और उनकी समस्याओं का उचित समाधान नहीं किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में अन्य किसानों के साथ भी ऐसी अनियमितताएं हो सकती हैं।
सहकारिता मंत्री केदार कश्यप से किसानों की सीधी मांग
कचनार और आसपास के ग्रामीणों ने प्रदेश के सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप तथा सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि केवल जांच और बयान लेने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यदि जांच में वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी हस्ताक्षर अथवा शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल विभागीय FIR दर्ज कराई जाए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- कचनार लैम्प्स के पूरे वित्तीय लेन-देन की विशेष जांच हो।
- पिछले दो वर्षों के KCC खातों और बैंक ट्रांजेक्शन का मिलान किया जाए।
- खाद वितरण रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर और किसानों के हस्ताक्षरों का सत्यापन हो।
- जिन किसानों के नाम पर खाद निकाली गई, उनसे वास्तविक पुष्टि की जाए।
- लैम्प्स प्रबंधक एवं संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो।
- आरोप प्रमाणित होने पर विभागीय FIR दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- किसानों को कथित आर्थिक नुकसान की भरपाई कराई जाए।
28 हजार की निकासी से लेकर खाद वितरण तक, उठ रहे कई सवाल
इस पूरे मामले में अब केवल एक किसान की शिकायत का सवाल नहीं रह गया है। कई किसानों के बयान, बैंक संबंधी जानकारी और खाद वितरण से जुड़े दस्तावेजों ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। ऐसे में विभाग को प्रत्येक शिकायत की अलग-अलग जांच कर तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करनी होगी।
जांच के दौरान कार्यालय बंद मिलने और संबंधित कर्मचारियों की अनुपस्थिति को भी जांच प्रतिवेदन में दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्धारित समय पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित क्यों नहीं थे।
सबसे बड़ा सवाल: किसानों को न्याय कब मिलेगा?
सरकार किसानों के हितों की रक्षा और सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात करती है। ऐसे में कचनार लैम्प्स से सामने आई शिकायतों का निष्पक्ष निराकरण बेहद जरूरी है। अब निगाहें सहकारिता विभाग के अधिकारियों और प्रदेश के सहकारिता मंत्री केदार कश्यप पर टिकी हैं।
क्या इस मामले में केवल जांच की औपचारिकता पूरी होगी या कथित वित्तीय अनियमितताओं की तह तक जाकर दोषियों पर कार्रवाई भी होगी? क्या किसानों को उनकी राशि और खाद वितरण से जुड़े मामलों में न्याय मिलेगा? इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और उसके निष्कर्षों से ही सामने आएगा।
THE EAGLE EYE NEWS की नजर
किसानों की मेहनत की कमाई और उनके अधिकारों से जुड़े इस मामले में पारदर्शी जांच जरूरी है। आरोपों की निष्पक्ष पुष्टि हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
सच की नजर तीखी और निडर!
रिपोर्ट: ओम साहू
THE EAGLE EYE NEWS
बस्तर, छत्तीसगढ़
नोट: समाचार किसानों द्वारा प्रस्तुत शिकायतों, उपलब्ध दस्तावेजों एवं ग्रामीणों के बयानों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच एवं संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद होगी। संबंधित पक्ष का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

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